International Journal of Humanities and Social Science Research

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International Journal of Humanities and Social Science Research
Vol. 7, Issue 4 (2021)

साम्प्रतिक संदर्भ में वृद्धों की बढ़ती समस्या एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमः उत्तराखण्ड के विशेष संदर्भ में


डॉ0 रवि कान्त कुमार, डॉ0 धर्मेन्द्र यादव

साम्प्रतिक संदर्भ में देखा जाए तो भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम समय की मांग बन गयी है। यह एक ऐसी औपचारिक व्यवस्था है जिसका उद्देश्य अपने समाज या क्षेत्र के रहवासियों एवं उनके परिवारों को आकस्मिक अप्रिय घटनाओं के समय एवं वृद्धावस्था में आने वाली आर्थिक समस्याओं से सुरक्षा प्रदान करना है। आज जबकि बदलते सामाजिक परिवेश में औद्योगीकरण एवं नगरीकरण की अप्रत्याशित विकास दर ने संयुक्त परिवार व्यवस्था को प्रभावित किया है, पारिवारिक संरचना निरंतर कमजोर हुई है। जिसका सबसे अधिक प्रभाव परिवार के वृद्ध सदस्यों पर पड़ा है। आज पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों के अवलोकन से स्पष्ट होता है किे अधिकांश ग्रामीण समुदाय में सिर्फ बुजुर्ग सदस्य ही निवासरत हैं जो विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं से जूझ रहेे हैं बावजूद इसके इस क्षेत्र को गुलजार रखने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। आज समाज में संयुक्त परिवार के विघटन, धन की पूजा एवं व्यक्तिवादिता की भावना का विकास जैसे जैसे बढ़ रहा है वैसे वैसे परिवार एवं समाज में बुजुर्ग सदस्यों की उपेक्षा निरंतर बढ़ती जा रही है। समाज में बढ़ती वृद्धाश्रम की संख्या इसी का प्रत्यक्ष उदाहरण मात्र है। एक समय जो व्यक्ति अपने बच्चों को पालता है, उसकी हर छोटी छोटी मांग पूरी करने के लिए हमेशा तत्पर रहता है तथा उसकी परवरिश के लिए आर्थिक उपार्जन करता है, वही व्यक्ति उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच कर अपने परिवार के लिए बोझ बन जाता है। उन्हें अपने ही बच्चे, जिसके लिए उन्होंने कभी अपनी खुशियां कुर्बान कर दी थी, को एक बेकार हिस्सा समझकर परिवार से बाहर वृद्धाश्रम तक पहुंचने को मजबूर कर रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि वह अपनी शारीरिक अक्षमता के कारण अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने बच्चों के उपर आश्रित हो जाता है। जब ये बच्चे किसी कारण उनका साथ छोड़ देते हैं तो वह दाने-दाने को मोहताज हो जाता है। वृद्धों को ऐसी ही परिस्थितियों से बचाने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत वृद्धा पेंशन की शुरूआत की गयी है। बावजूद इसके आज भी समाज में बहुत से ऐसे परिवार हैं, जो इस प्रकार की योजनाओं का लाभस लेने से वंचित है। प्रस्तुत शोध के आलेखन का उद्देश्य तथ्यों को प्रकाश में लाना है तथा इसके ऐतिहासिक पहलूओं पर प्रकाश डालना है।
Pages : 114-117