International Journal of Humanities and Social Science Research

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International Journal of Humanities and Social Science Research
Vol. 3, Issue 8 (2017)

बुन्देलखण्ड (उत्तर प्रदेश) प्रदेश के बाॅदा-चित्रकूट धाम जनपद का आरण्य क्षेत्र: पादक भूगोल में एक अध्ययन


शिशंकर द्विवेदी, रमाकन्त द्विवेदी

पृथ्वी के जीवमण्डल में पादप जगत का सार्वाधिक महत्व है। पृथ्वी का वह स्वरूप जिसने जीनव की कल्पना को सार्थक किया वह पादप जगत ही है। इस पृथ्वी पर जीवन पादप जगत से चालू होता है, और अन्त भी पादप से होगा। इस लिए इसका अध्ययन और भी आवश्यक है। इस पृथ्वी पर पादप समूह को वनस्पति कहा गया है। पृथ्वी के विस्तृत भू-भाग पर वनस्पति के विसतृत भाग के आवरण को आरण्य कहा गया है। इन आरण्यों का बहुल्ता से उल्लेख हमारे वेदों में विस्तृत से मिलता है। वेद काल में भू-खण्ड की पहचान आरण्यों से ही होती थी। आज भी चित्रकूट-बाॅदा जनपद के कुछ भाग आज भी वैदिक कालीन आरण्य के दर्शन कराते हैं, इन्हीं आरण्यों में हमारा अध्ययन क्षेत्र चित्रकूट-बाॅदा का क्षेत्र आता है। परन्तु वर्तमान स्वरूप देख कर लगता है कि क्या कभी यह भू-भाग आरण्य थे। शोधार्थी का शोध पत्र जनपद में आरण्य क्षेत्र की खोज ही है।
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