International Journal of Humanities and Social Science Research

International Journal of Humanities and Social Science Research


International Journal of Humanities and Social Science Research
International Journal of Humanities and Social Science Research
Vol. 6, Issue 6 (2020)

झारखण्ड राज्य में नगरीकरण की प्रवृत्ति


मुकेश कुमार

प्रस्तुत शोध-पत्र द्वारा भारत के झारखण्ड राज्य में नगरीकरण की दशा एवं दिशा को प्रकाश में लाया गया है। 15 नवम्बर 2000 ई. को झारखण्ड राज्य भारत का 28वां राज्य बना है। इस राज्य में भारत वर्ष के औसत नगरीकरण से कम प्रतिशत में नगरीकरण हुआ है। 2011 के जनगणना के अनुसार इस राज्य में 24.05 प्रतिशत नगरीय आबादी है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर नगरीय आबादी 31.14 प्रतिशत है, से काफी कम है। नगरीय आबादी कम होना इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को दर्शाता है। 1901 ई. से 2011 ई. के जनगणनानुसार झारखण्ड राज्य की नगरीय आबादी एवं नगरों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 1901 ई. में कुल 13 नगर थे और इन शहरों में कुल आबादी का मात्र 1.94 प्रतिशत लोग रहते थे जो 2011 ई. में बढ़कर 228 नगर और इन शहरों में कुल आबादी 24.05 प्रतिशत हो गई। 2001 ई. से 2011 ई. के बीच नगरों की संख्या में काफी वृद्धि हुई पर नगरीय आबादी वृद्धि की गति काफी कम रही। झारखण्ड राज्य बनने के बाद यहाॅं की राज्य सरकार द्वारा विकास के कार्य किये जा रहे हैं और नगरीकरण पर जोर दिया जा रहा है। 2011 ई. के जनगणना के अनुसार इस राज्य में कुल 228 नगर है जिसमें 10 बड़े नगर हैं। इन 10 बड़े नगरों में कुल नगरीय आबादी का 54.6 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। इन 10 बड़े नगरों में ज्यादातर नगर औद्योगिक नगर हैं एवं कुछ नगर धार्मिक पर्यटक नगर हैं। झारखण्ड राज्य खनिज सम्पदा एवं जंगल की प्रचुरता से भरा है।
Download  |  Pages : 56-61
How to cite this article:
मुकेश कुमार. झारखण्ड राज्य में नगरीकरण की प्रवृत्ति. International Journal of Humanities and Social Science Research, Volume 6, Issue 6, 2020, Pages 56-61
International Journal of Humanities and Social Science Research