International Journal of Humanities and Social Science Research

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International Journal of Humanities and Social Science Research
Vol. 7, Issue 2 (2021)

पन्ना टाइगर रिजर्व में विलुप्त प्रजाति गिद्ध प्रजनन स्थल के संरक्षण एवं प्रबन्धन का एकः भौगोलिक अध्ययन


महेश कुमार, डाॅ. वी. के शर्मा

विश्व भर में विभिन्न प्रजातियों की संख्या में लगातार कमी चली आ रही है, जो थमने का नाम नहीं ले रही है। इस प्रकार की भयावय स्थिति का मुख्य कारण पर्यावरणीय असंतुलन है। जिसका मुख्य पहलु सिर्फ हम स्वार्थी मानव हैं, जो दिन प्रतिदिन नवीन प्रद्यौगिकी की खोज तथा उसकी क्षमता बढ़ाने में लगा हुआ है। वही दूसरी ओर जो प्रकृति के अनुरूप सतत् विकास पर कल्पना तथा कार्य पूरे विश्व में संचारित करने पर जोर दे रहा है। परन्तु वही संकटापन्न की ओर पहुच रही अनेक प्रजातियों पर विशेष ेध्यान ना के बराबर है। इस प्रकार भारत में अनेक प्रजातियाँ संकटापन्न की स्थिति पर पहुच चुकी है। जैसे- गौरैया, सफेद बगुला आदि के भी विलुप्ती के संकेत मिलने लगे है। वही ज्यादातर विलुप्त हो चुकी गिद्ध प्रजातियों की संख्या में लगभगग तीन दषक ऋणात्मक वृद्धि दर्ज हुई है। केन्द्रीय पर्यावरण व एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में लगभगग तीस वर्शो में गिद्धों की अबादी चार करोड़ से कम हो कर मात्र 19 हजार रह गयी है। इसी प्रकार से मध्य प्रदेश के पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में गिद्धों की लगभगग 8 प्रजातियां पायी गयी हैं। जो अध्ययन के मुताबिक इनकी संख्या में कमी वृद्धि देखने को मिल रही है। इस प्रकार की गिरावट का पता वर्ष 2011 के दशक में चला और वर्ष 2019 आते ही लगभगग 68 प्रतिशत गिद्धों की रेसिडेट जिप्स प्रजाति में भारी गिरावट प्राप्त हुई, अध्ययन के दौरान पन्ना रिजर्व में लगभग 55 गिद्ध सहवास स्थल तथा दो प्रजनन स्थल स्थापित मिले जिसमें एक च्ज्त् और दूसरा पवई में स्थापित है। जिसकी निगरानी देखभाल मध्य प्रदेश राज्य वन विभाग पन्ना रिजर्व द्वारा संरक्षण एवं प्रबन्धन के पुख्ता इंतजाम किये गये है, जो विहित कार्य संरक्षण एवं प्रबन्धन द्वारा संभव हो सकता है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रस्तुत अध्ययन ‘‘पन्ना टाइगर रिजर्व में विलुप्त प्रजाति गिद्ध प्रजनन स्थल के संरक्षण एवं प्रबन्धन का एक: भौगोलिक अध्ययन‘‘ किया गया है।
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