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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
वर्तमान भारतीय परिपेक्ष्य में दुर्लभ बीमारियों के मरीजों के मनौवैज्ञानिक परिस्थितियों के सम्बन्ध में आंकलन एवं अध्ययन
Authors
Vaibhav Bhandari
Abstract
मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य दोनो परस्पर एक-दुसरे से संबंधित होते हैं। दुर्लभ बीमारी के कारण अवसाद और चिंता, मानसिक रुप से व्यक्ति को नकारात्मक से प्रभावित कर सकता है, जिससे रुग्णता और मृत्यु दर में वृद्धि के साथ-साथ बीमारी के स्वरुप को अधिक प्रभावित कर सकती है और यह रोगियों के जीवन की समग्र गुणवत्ता के लिए खतरा है। दुर्लभ बीमारियों के रोगियों में अवसाद और चिंता का पता लगाना और उनका इलाज करना आवश्यक है, जो कि रोगियों के समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। इस परिपेक्ष्य में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य हेतु अवसाद और चिंता के व्यवस्थित रूप से आंकलन हेतु दुर्लभ बीमारी के रोगियों की स्क्रीनिंग एक प्रमुख हिस्सा हो सकता है। वर्तमान में अवसाद और चिंता दोनों के लिए उपयोगी और मान्य स्क्रीनिंग टूल उपलब्ध हैं। यह देखते हुए कि सभी दुर्लभ बीमारियों में से 80ः की उत्पति कारण आनुवंशिक होने के कारण ठीक नहीं किया जा सकता है, परन्तु प्रभावी रूप से अवसाद और चिंता को संबोधित करके, रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।
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Pages:115-119
How to cite this article:
Vaibhav Bhandari "वर्तमान भारतीय परिपेक्ष्य में दुर्लभ बीमारियों के मरीजों के मनौवैज्ञानिक परिस्थितियों के सम्बन्ध में आंकलन एवं अध्ययन ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 115-119
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