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VOL. 4, ISSUE 1 (2018)
संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका खाड़ी युद्ध के संदर्भ में
Authors
डॉ. सी. के. भगत
Abstract
विश्व में तेल उत्पादक खाड़ी देशों का विशेष महत्व है। तेल उत्पादक देश ईराक, ईरज, कुवैत, सउदी अरब प्रमुख देशों के अलावा संयुक्त राज्य अमीरात, तर्की, लेबबानान, बहरीन, सीरीया, इजराइल, कतर भी शामिल है। इन देशों के पूर्व में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और पश्चिम में भूमध्य सागर और यूरोपीय देश दक्षिण मंे अरब सागर, अदन तथा मध्य में फारस की खाड़ी है। पूर्व और पश्चिम एशिया में तेल सम्पदा को लेकर इसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाती है। तेल के कारण ही अपना प्रभाव को उस क्षेत्र में बढ़ाने का प्रयास सभी बड़े-राष्ट्रों के द्वारा की जाती है और यही उस क्षेत्र में परस्पर प्रतिद्वन्दिता का कारण हो जाती है। इसी कारण शीत युद्ध और सैन्य स्पर्घा का भी केन्द्र हो गया और इसी के फलस्वरूप पश्चिमी एशिया खाड़ी युद्ध की ओर बढ़ने लगा। 21 अगस्त 1990 में खाड़ी क्षेत्र मंे युद्ध का बिगुल बज गया था जबकि इसकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने अपनी सीमा से लगे तेल क्षेत्रों से तेल को निकालने का आरोप कुवैत के ऊपर लगाया। इराक द्वार इस तेल चोरी के आरोप और सीमा विवाद का आधार बनाकर 2 अगस्त 1990 को कुवैत पर आक्रमण कर उस पर अपना कब्जा जमा लिया। लेकिन अमेरिका द्वारा कुवैत के ऊपर आक्रमण में कुवैत के पत्र में आ जाने पर इसका स्वरूप बदल गया और यह युद्ध इराक-अमेरिका का हो गया। कुवैत की ओर से अमेरिका के नेतृत्व में 34 देशो ने युद्ध में भाग लिया और इराक अकेले इन राष्ट्रो का सामना किया। इस युद्ध को खाड़ी युद्ध के नाम से जाना जाता है।
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Pages:78-79
How to cite this article:
डॉ. सी. के. भगत "संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका खाड़ी युद्ध के संदर्भ में". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 4, Issue 1, 2018, Pages 78-79
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