ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 2 (2019)
जयपुर जिले में शस्य वितरण प्रतिरुप : समस्यायें व संभावनाये
Authors
नीरज कुमार जाँगिंड, डाॅ0 सीमा श्रीवास्तव
Abstract
मानव की प्राथमिक आर्थिक क्रियाओं में कृषि का सर्वाधिक महत्व है। आज भी लगभग 2/3 से अधिक आबादी कृषि व कृषि से सम्बन्धित आर्थिक क्रियाओं में संलग्न है। हमारे देश में कुल भूमि के 47.48 प्रतिशत भू-भाग पर कृषि कार्य किया जाता है। देश कृषिगत भू-भाग का क्षेत्रफल 14.5 करोड़ हैक्टेयर है, जो विश्व की कुल कृषिगत भूमि का लगभग 12.1 प्रतिशत है। अतः कृषि विकास शोध कार्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। फसल प्रतिरूप किसी कृषि प्रदेष के कृषि -भूदृश्य का प्रतीक है, जो वहाँ की कृषि आगतों, प्रौद्योगिकी विकास, संस्थागत ढांचा, फसल-वैविध्यकरण और कृषि प्रवृतियों का द्योतक है। प्रस्तुत अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य जिले में कृषि प्रवृतियों का अध्ययन करतें हुये फसल प्रतिरूप ज्ञात करना है, जिससे कि जिले के कृषक फसलों का चयन आसानी से कर सके ताकि अधिक उत्पादन से सामाजिक-आर्थिक जीवन स्तर को ऊँचा बढ़ा सके । अन्य कारकों में स्थानीय भौतिक, आर्थिक, सामाजिक व संस्थागत कारक महत्वपूर्ण है, जो मिलकर कृषि -भूदृश्य का निर्माण करतें है। विभिन्न प्रकार के फसल प्रतिरूप कृषि विकास को प्रभावित करते है और फसल प्रतिरूप को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों में से सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई कारक है। प्रस्तुत शोध-प्रत्र जयपुर जिले के संदर्भ में फसल प्रतिरूप में होने वाले परिवर्तन का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह शोध कार्य उपलब्ध सामग्री, रिर्पाटस् तथा विभिन्न सांख्यिकीय आंकड़ो की सहायता से पूर्ण किया गया है। आर्थिकी एवं सांख्यिकीय रूपरेखा, जयपुर, कृषि अनुसंधान विभाग, दुर्गापुरा आदि संस्थाओं एवं विभिन्न रिपोर्टस को से सांख्यिकीय तथ्यों एवं आंकड़ों को संग्रहित किया गया एवं द्वितीयक आंकड़ों को सारणीय प्रारूप में वर्गीकृत एवं विश्लेषित किया गया। 1971 में जयपुर जिले में सर्वाधिक कृषि क्षेत्र पर बाजरा (2.49 लाख हेक्टेयर) तथा उसके बाद क्रमशः खरीफ दालें (1.42 लाख हेक्टेयर), चना (1.22 लाख हेक्टेयर) तथा गेहूँ (1.02 लाख हेक्टेयर) बोया गया। सिंचाई साधनों के विकास, कीटनाशकों, उन्नत बीजों, नयी तकनीकों, व सरकारी नीतियाँ व प्रयास के फलस्वरूप गेहूँ के अधीन क्षेत्रफल बढ़कर 2015 में 1.58 लाख हेक्टेयर हो गया, जो कि बाजरा (2.97 लाख हेक्टेयर ) के बाद सर्वाधिक है। प्रस्तुत अध्ययन में विभिन्न फसलों के प्रारूप में परिवर्तनों का एवं इन पर सिंचाईं के प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए उपलब्ध आंकडो का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है।
Download
Pages:37-41
How to cite this article:
नीरज कुमार जाँगिंड, डाॅ0 सीमा श्रीवास्तव "जयपुर जिले में शस्य वितरण प्रतिरुप : समस्यायें व संभावनाये". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 5, Issue 2, 2019, Pages 37-41
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

