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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 5, ISSUE 2 (2019)
‘प्रसाद’ के काव्य : बिम्ब विधान में वविध्य
Authors
डाॅ0 समयलाल प्रजापति
Abstract
इन्द्रियों के आधार पर बिम्बों का वर्गीकरण केवल विवेचन की सुविधा के लिए किया जाता है, क्योंकि बिम्ब-विधान की प्रक्रिया में मन एकाधिक इन्द्रियों के विषय में संचरण करता है। अतः बिम्ब स्वरूपतः किसी न किसी अंश तक संश्लिष्ट रहते हैं। वर्ग विशेष के अन्तर्गत उनका स्वरूप-निर्धारण किसी एक तत्व की प्रधानता के आधार पर होता है। कवि की सफलता इस बात में है कि वह बिम्बों का संग्रहण इस प्रकार करे कि उसकी रचना क्रय-हीन बिम्बों का मात्र ‘‘एलबम’’ न बन जाये। एक ही प्रतिपाद्य विषय के विविध पक्षों के सौन्दर्य का उद्घाटन करने के लिये रूप, शब्द आदि विविध बिम्बों का स्थान-स्थान पर संयोजन किया जाता है।
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Pages:42-45
How to cite this article:
डाॅ0 समयलाल प्रजापति "‘प्रसाद’ के काव्य : बिम्ब विधान में वविध्य". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 5, Issue 2, 2019, Pages 42-45
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