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VOL. 5, ISSUE 5 (2019)
नशीले पदार्थो का सेवन युवा पीढ़ी के लिए एक अभिशाप
Authors
सनातन सिंह ओझा, बी. डी. एस. गौतम
Abstract
नशा एक अभिशाप है, यह ऐसी बुराई है, जिससे इंसान का अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है। नशे के लिए समाज में शराब, गांजा, भांग, अफीम, जर्दा, गुटखा, तम्बाकू और धूम्रपान सहित चरस, स्मैक, कोकीन, ब्राउन सुगर जैसे घातक मादक दवाओं और पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। आजकल युवक सायलेंट नशे के लिए सिन्थेटिक नशे के साथ चरस का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं। इन जहरीले और नशीले पदार्थों के सेवन से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि पहुँचने के साथ ही इससे सामाजिक वातावरण भी प्रदूषित होता है। साथ ही स्वयं और परिवार की सामाजिक स्थिति को भी भारी नुकसान पहुँचता है। इतना ही नहीं नशे के आदी को समाज में हेय दृष्टि से भी देखा जाता है, जिसके चलते उसकी समाज एवं राष्ट्र के लिए उपयोगिता शून्य हो जाती है। युवा वर्ग नशे से अपराध की ओर अग्रसर हो जाता है तथा शांतिपूर्ण समाज के लिए अभिशाप बन जाता है। नशा अब एक अन्तर्राष्ट्रीय विकराल समस्या बन गयी है। दुव्र्यसन से आज स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग और विशेषकर युवा वर्ग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इस अभिशाप से समय रहते मुक्ति पा लेने में ही मानव समाज की भलाई है। जो इसके चंगुल मेे फंस गया, वह स्वयं तो बर्बाद होता ही है इसके साथ ही साथ उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है। साथ ही उसका कैरियर भी चैपट हो जाता है। इसको दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि आजकल नौजवान फ्लूड और स्मैक को फैशन और शौक के रूप में अपना लेते हैं। इस पर शासन प्रशासन के सभी दावे फेल हो रहे हैं। शासन प्रशासन युवाओं में बढ़ती नशाखोरी पर अंकुश लगाने को लेकर तमाम प्रयास करने की बात करते न थकते, लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति उलट ही नजर आती है। यदि सरकार समय रहते इस पर ध्यान नहीं देती तो आने वाले समय में इसका प्रभाव काफी बुरा देखने को मिलेगा, जब देश का भविष्य युवा वर्ग ही नशे में बर्बाद कर देगा तो फिर हमारा देश किस ओर अग्रसर होगा जो काफी चिंतनीय विषय है।
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Pages:35-37
How to cite this article:
सनातन सिंह ओझा, बी. डी. एस. गौतम "नशीले पदार्थो का सेवन युवा पीढ़ी के लिए एक अभिशाप". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 5, Issue 5, 2019, Pages 35-37
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