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VOL. 6, ISSUE 4 (2020)
औपनिवेशिक बिहार में सहकारिता आन्दोलनः एक विश्लेषण
Authors
पूनम राजलक्ष्मी
Abstract
औपनिवेशिक काल से ही सहकारिता आंदोलन का दौर चल रहा है। आज यह आंदोलन विराट रूप ले लिया है और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस आंदोलन ने पूरे देश के साथ-साथ बिहार को भी आर्थिक रूप से समृद्ध किया है। साथ ही इससे देश में बेरोजगारी की समस्या पर भी बहुत हद तक लगाम लग सका है। ऐसे में इस आंदोलन से बिहार कैसे वंचित रह सकता है। कालखंड एवं परिस्थिति का प्रतिकूल प्रभाव यहाँ के आम लोगों पर पड़ना लाजमी है। एक अनुमान के अनुसार पूरे देश में करीब 5 लाख से भी अधिक सहकारी समितियाँ सक्रिय हैं, जिनमें करोड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है। ये समितियाँ समाजिक जीवन के अनेक क्षेत्रों में काम कर रही हैं। खासतौर से कृषि, उर्वरक और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में इनकी भागीदारी सर्वाधिक है। अब तो बैंकिंग क्षेत्रों में भी सहकारी समितियाँ काम कर रही हैं।
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Pages:24-25
How to cite this article:
पूनम राजलक्ष्मी "औपनिवेशिक बिहार में सहकारिता आन्दोलनः एक विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 6, Issue 4, 2020, Pages 24-25
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