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VOL. 6, ISSUE 4 (2020)
जनजातियों की सामाजिकः आर्थिक स्थिति पर नक्सलवाद का प्रभाव
Authors
हेमलता बोरकर वासनिक
Abstract
भारत एक विशाल जनसंख्या बाहुल्य देश है। यहां पर विविध समुदाय के लोग निवास करते हैं। भारत की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत भाग जनजातियों का है ये जनजातियाँ सुदूर घने जंगलों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती है। छ.ग. राज्य भी एक जनजाति बाहुल्य राज्य है। यहां लगभग 7.8 प्रतिशत जनजाति निवास करती हैं। यहां की अधिकांश जनजातियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के दुर्गकोंदल विकासखंड के अंदर निवास करने वाली जनजातियाँ सुदूर घने पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती है। बस्तर संभाग का यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। भारत में नक्सलवाद शब्द की उत्पति पश्चिम-बंगाल से हुई थी।1967 में चारू मजूमदार एवं कानू सान्याल के द्वारा इस शब्द का प्रय®ग किया गया था । माक्र्सवादी एवं लेलिनवादी विचार®ं से प्रभावित ह®कर चारू मजूमदार ने सामाजिक असमानता के विर®ध में 1969 में कम्यूस्टि पार्टी का गठन किया था । कम्यूनिस्ट पार्टी के गठन का मुख्य उद्देश्य जनजातियों को जमीदार®ं के शोषण से बचाना था तथा उनके सामाजिक अस्तित्व को बनाए रखना था। प्रारंभ में छ®टे- छ®टे किसान एवं मजदूर अपनी गिरवी जमीन क® छुड़वाने के लिए हथियारबंद नक्सलवादी विचारधारा क¨ अपनाया करते थे। सन् 1972 में चारू मजूमदार की मृत्य के पश्चात् इसने हिंसा का रूप ले लिया। आज नक्सलवाद एक बड़ा संगठन बनकर उभर कर आया है।
छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सलवाद का उदय 2003 से माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य का सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर संभाग है। यहां अक्सर नक्सली वारदात होते रहते हैं और इसका सीधा प्रभाव जनजातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के उदय होने का कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध करना है क्योंकि इन कंपनियों के खुलने से संपूर्णं जनजाति समाज प्रभावित होने वाला था। नक्सलवादी संगठनों का उदय होने के पीछे अन्य कारण जनजातीय समुदाय के जीविकोपार्जन के साधन®ं पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आधिपत्य को हटाने के लिए नक्सलवादी संगठनों का उदय होना माना जाता है परंतु वर्तमान में नक्सलवादी संगठनोें का दहशत इतना अधिक बढ़ गया कि लोगों का जीना दूभर हो गया है।
प्रस्तुत शोध आलेख में जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर नक्सलवाद के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। यह शोध आलेख प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। प्राथमिक तथ्यों का संकलन साक्षात्कार-अनुसूची उपकरण के माध्यम से किया गया है।
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Pages:101-104
How to cite this article:
हेमलता बोरकर वासनिक "जनजातियों की सामाजिकः आर्थिक स्थिति पर नक्सलवाद का प्रभाव". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 6, Issue 4, 2020, Pages 101-104
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