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VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
भारत में कृषक-आन्दोलन का ऐतिहासिक दृष्टिकोणः एक विश्लेषण
Authors
संध्या कुमारी
Abstract
भारत में कृषक आन्दोलन का एक सुदृढ़ इतिहास रहा है जिसे ऐतिहासिक दृष्टिकोण से दो भागों में विभक्त किया जा सकता है-प्रथम स्वतंत्रता-पूर्व कृषक आन्दोलन तथा द्वितीय स्वतंत्रता-पश्चात् कृषक आन्दोलन। जहाँ तक स्वतंत्रता-पूर्व कृषक आन्दोलन का प्रश्न है, इस पर विभिन्न दृष्टिकोण से प्रकाश डालने का प्रयत्न किया गया है-विशेषतः कृषक आन्दोलन के प्रति अंग्रेज प्रशासकों की दृष्टिकोण अकार्यात्मक रही है। उनकी दृष्टि में कृषक आन्दोलन सरकार एवं समाज को कमजोर करने के लिए चलाए जाते थे। जैसे-मोपला विद्रोह को अंग्रेजों ने हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष का नाम देकर उसे साम्प्रदायिक रूप देने का प्रयत्न किया था। लेकिन ठीक इसके विपरीत प्रो. धनागरे का विश्लेषण है, जिसमें कृषक विद्रोह को राजनैतिक गतिविधियों की अन्तःक्रिया का रूप देकर चित्रित किया गया है। इस प्रकार कृषक आन्दोलनों का अध्ययन विभिन्न विद्वानों ने अपनी-अपनी दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है।1
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Pages:05-06
How to cite this article:
संध्या कुमारी "भारत में कृषक-आन्दोलन का ऐतिहासिक दृष्टिकोणः एक विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 05-06
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