Logo
International Journal of
Humanities and Social Science Research
ARCHIVES
VOL. 6, ISSUE 5 (2020)
महात्मा गाँधी के समाजवादी व मानवतावादी विचारों का विश्लेषण
Authors
हेमलता बोरकर वासनिक
Abstract
समाजवादी एवं मानवतावादी विचारो की अवधारणा एक व्यापक अवधारणा है इसके अंर्तगत लैंगिक समानता, समानाधिकार समावेशी विकास, आर्थिक समानता एवं सदाचार पूर्ण व्यवहार को रखा जा सकता हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व देश में काफी असमानताएं थी रंगभेद, जातिवाद, छूआछूत, लैंगिक भेदभाव, शैक्षणिक़ असमानता से जुड़ी घटनाएं आम बात थी जिसके कारण से एक वर्ग विशेष लोगों का ही समाज पर प्रभुत्व था तथा समाज दो वर्गों में बंट गया था शोषक एवं शोषित वर्ग । इससे समाज मेँ काफी हिंसक घटनाएं घटित होती थी तथा उन घटनाओं का विरोध करने की किसी में हिम्मत भी नहीं होती थी, और लोग चुपचाप भय के कारण घटना का सामना करते थे। उस समय न्याय व्यवस्था एक दम जटिल थी केवल विशेष वर्ग का व्यक्ति ही इसका लाभ ले सकता था, आम व्यक्तियों के लिए न्याय व्यवस्था का कोई महत्व नहीं था। इन विसंगतियों को जब सामाजिक कार्यकर्ताओं जैसे राजाराम मोहन, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, केश्वचंद्र सेन, डॉ भीमराव अम्बेडकर, महात्मा गांधी एवं रानाडे, सरदार वल्लभ भाई पटेल, स्वामी दयानंद सरस्वती ने एक साथ मिलकर इन विसंगतियों को समाज से दूर करने का प्रयास किया। महात्मा गांधी ने सामाजिक उत्थान से संबंधित कई कार्य किए जिनमें से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, सामाजिक अस्पृस्यता की रोकथाम, महिला शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं जन स्वाधिनता से संबंधित कार्य है। इसके अलावा मानवतावाद एक समाजवाद पर भी इन्होंने कार्य किए हैं। प्रस्तुत अध्ययन में गाँधी जी के समाजवादी एवं मानवतावादी विचार धाराओं का विश्लेशण करने का प्रयास किया हैं।प्रस्तुत शोधपत्र् द्वितीयक स्त्रोंतो पर आधारित हैं।
Download
Pages:11-13
How to cite this article:
हेमलता बोरकर वासनिक "महात्मा गाँधी के समाजवादी व मानवतावादी विचारों का विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 6, Issue 5, 2020, Pages 11-13
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.