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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 7, ISSUE 5 (2021)
योगदर्शन में पंचक्लेश एक अध्ययन
Authors
डॉ. अजित कुमार
Abstract
‘क्लिश्नन्ति इति क्लेशाः‘ इस व्युत्पत्ति के आधार पर जिनके द्वारा प्राणी दुःख को प्राप्त करते हैं, वे क्लेश कहे जाते हैं। क्लेश कहे जाने का कारण देते हुए भोजदेव इन्हें बाधना रूप पीड़ा को देने वाला बताते हैं। तात्पर्य यह है कि इन क्लेशों के द्वारा ही प्राणी त्रिविध तापों को भोगता है। विज्ञानभिक्षु के मत में दुःखदायक होने के कारण ही अविद्यादि क्लेश कहे जाते हैं। ये क्लेश संस्कार रूप से चित्त में विद्यमान रहते हैं, यद्यपि उस काल में किसी प्रकार के कष्ट का अनुभव प्राणी नहीं करता है, परन्तु भविष्य में ये दुःख के कारण बनेंगे यह जानते हुए विवेकी इन्हें नष्ट करने का प्रयत्न करते हैं। रागादि के द्वारा भी उनके व्यवहार काल में सामान्यजन दुःख को नहीं जान सकते, परन्तु विवेकी उस राग के कारण भविष्य में होने वाले दुःख को जान लेता है, इसीलिए कहा है कि विवेकी के लिए सब दुःखपूर्ण ही है।
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Pages:44-47
How to cite this article:
डॉ. अजित कुमार "योगदर्शन में पंचक्लेश एक अध्ययन ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 7, Issue 5, 2021, Pages 44-47
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