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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
जीवन साथी चयन के बदलते स्वरूप; एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Authors
स्वराज पाल
Abstract
समाज में विवाह आज भी महत्वपूर्ण संस्था है। भारतीय समाज व संस्कृति को बनाए रखने में विवाह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विवाह के माध्यम से युवक-युवतियों (जोड़ों) को समाज में एक नई प्रस्थिति प्राप्त होती है। पश्चिमी शिक्षा व सामाजिक-आर्थिक बदलाव ने जीवनसाथी के चयन में व्यापक बदलाव किए हैं तथा जीवनसाथी की चयन प्रक्रिया में यह परिवर्तन देखे जा सकते हैं। भारतीय समाज में आज भी योजित विवाह (अरेंज मैरिज) का अपना महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है तथा समाज में जीवनसाथी के चयन के निर्णय जो परंपरागत या ऐतिहासिक रूप से पितृसत्तात्मक चरित्र के थे, में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। पहले माता-पिता व रिश्तेदारों की जीवनसाथी के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका होती थी, जो आज बदलकर स्वयं के निर्णय व संयुक्त निर्णय (जिसमें माता-पिता की सहमति व युवक-युवतियों की पसंद को भी ध्यान में रखा जा रहा है) की ओर परिवर्तित हुई हैं। साथ ही विवाह हेतु साथी चयन में आयु, धर्म, जाति, व्यवसाय आदि के साथ-साथ प्रत्याशियों की सामाजिक स्तर, आर्थिक स्तर, सौंदर्य, शिक्षा आदि को महत्व दिया जाने लगा है।जीवन साथी चयन में युवक-युवतियों के निर्णय में भागीदारी के साथ साथ पुरुष एवं महिला प्रत्याशियों के निर्णय एवं जीवन साथी के चयन के आधारों में बदलाव भी साफ दिखाई देते हैं। वर्तमान में देखने में आया है कि वर वधु अपने लिए जीवनसाथी के चुनाव स्वयं कर रहे हैं जिसमें वह परंपरागत आधारों की तुलना में नवीन या व्यक्तित्व विशेषता संबंधी आधारों को प्रमुखता दे रहे हैं। किंतु यह परिवर्तन केवल शहरी क्षेत्रों में ही दिखाई देते हैं जबकि रूढ़ीवादी ग्रामीण क्षेत्र में आज भी जीवनसाथी के चयन के परंपरागत तरीके ही विद्यमान है। शहरी क्षेत्र में अंतरजातीय अंतर धार्मिक विवाह भी दिखाई देते हैं किंतु रूढ़ीवादी है ग्रामीण क्षेत्र में यह ना के बराबर हैं।
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Pages:10-12
How to cite this article:
स्वराज पाल "जीवन साथी चयन के बदलते स्वरूप; एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 10-12
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