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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
स्वामी विवेकानन्द का अल्मोड़ा स्पर्श
Authors
हेमन्त कुमार
Abstract
प्राचीन काल से भारतीय सभ्यता, संस्कृति तथा धर्म को लेकर सभी धर्मगुरुओं व विशेषज्ञों में असमंजस्य बना हुआ था कोई इसे सनातन या कोई इसे रूढ़िवादी कह कर पुकारता था। शिकागो सम्मेलन में जिस तरह से स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय संस्कृति व सभ्यता पर व्याख्यान दिया। सम्पूर्ण पाश्चात्य जगत की पूर्व धारणा परिवर्तित हो गई। उसके उपरान्त स्वामी जी की विश्व पटल पर एक अलग व्यक्तित्व के रूप में पहचान हुई। शिकागो से पूर्व स्वामी जी को अपनी सरजमी पर उतनी प्रसिद्धि नहीं मिली थी, जितनी शिकागो सम्मेलन के बाद मिली। भारतीय जनमानस में भी अपनी संस्कृति व धर्म के प्रति जागरुकता नहीं थी। स्वामी जी ने सम्पूर्ण भारत की पैदल या कर के भारतीय संस्कृति व सभ्यता को और करीब से जानने का प्रयास किया। भारत भ्रमण के दौरान उनका उŸाराखण्ड भ्रमण भी हुआ। यहां आकर उन्होंने वेद, वेदान्तों पर अनेक व्याख्या दी है। कुमाउॅ आने पर सामान्य जन मानस की चेतना पर सकारात्म प्रभाव पडा।
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Pages:93-94
How to cite this article:
हेमन्त कुमार "स्वामी विवेकानन्द का अल्मोड़ा स्पर्श ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 93-94
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