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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
हिन्दू पत्नी के विरूद्ध वैवाहिक अवचार एवं उपचार
Authors
Dr. Subodh K Singh
Abstract
प्राचीन काल से हमारी संस्कृति पुरूष प्रभुत्व सम्पन्न संस्कृति रही है। यही कारण रहा है कि हिन्दू समाज में वैवाहिक विषयक प्रकरणों में पुरूषों को जैसी प्रास्थिति अर्जित है, वैसी प्रास्थिति महिलाओं को कभी अर्जित नही हो सकी। भारतीय हिन्दू समाज में पत्नी के विरूद्ध पति द्वारा किये गये वैवाहिक अवचार को समाज उस कठोरतापूर्वक संज्ञान में नही लेता है, जैसा कि यही अवचार पत्नी द्वारा किये जाने पर लिया जाता है। पति द्वारा पत्नी के विरूद्ध किसी प्रकार के वैवाहिक अवचार किये जाने की दशा में उसे उसका प्रतिरोध करने का हक नही प्राप्त हुआ करता था, वहीं पत्नी द्वारा किये गये वैवाहिक अवचार की दशा में उसके कृत्य के विरूद्ध पूरा समाज एवं उसके निकट सम्बन्धी भी उसके प्रति कठोर रूख अपनाने से नही हिचकते थे। यहाँ तक कि उसे उसके द्वारा किये गये अवचार हेतु दण्ड का भी प्रावधान किया गया था। भारतीय समाज संक्रमणकालीन अवस्था से गुजर रहा है, ऐसे में जहाँ एक और पुरातन अवधाणाएं एवं मान्यताएं शिथिल पड़ रही हैं, वहीं नवीन संस्कृति एवं सभ्यता का प्रार्दुभाव हो रहा है। इस प्रकार भारतीय समाज मे पत्नी के सेवायोजन ग्रहण करने पर वैवाहिक सम्बन्धों में निवास स्थान एवं पत्नी के वेतन पर नियंत्रण को लेकर पक्षकरों में तनाव एवं विवाद उत्पन्न होने की संख्या मे निरन्तर वृद्धि होे रही है। ऐसे अधिकांश प्रकरणों में जब पति सन्तुष्ट नही होता है, तो वह दम्पत्य अधिकारों के पुर्नस्थापन के सहारे सेवायोजित पत्नी को उसकी परम्परागत प्राचीन प्रास्थिति घर तक परिसीमित करने का प्रयास करता है। वर्तमान समय में जबकि पूरा विश्व समुदाय एक गाँव के रूप में सिमट रहा है, महिलायें भी अपने अधिकारो के प्रति पर्याप्त सचेष्ट एवं जागरूक हो गयी हैं। वह आज यथा-सम्भव प्रयासरत है कि उन्हें वैसी ही वैवाहिक प्रास्थिति अर्जित हो जैसी की समाज में पुरूषों को प्राप्त है। इस दिशा में लगातार महिला आन्दोलनों के परिणाम स्वरूप विधायिका भी सक्रिय रूप से महिलाओं को पुरूषो के समतुल्य एवं न्यायोचित वैवाहिक प्रास्थिति को प्रदत्त करने में सक्रिय हो रही है। इस निमित्त विधायिका ने समय-समय पर विधायी संशोधनों द्वारा महिलाओं के वैवाहिक प्रास्थिति उन्नयन की दिशा में अपनी भूमिका निर्वहन करने का सार्थक प्रयास किया है। न्यायपालिका सामाजिक अभियन्त्रिकी में केन्द्रीय भूमिका का निर्वहन करती है। भारतीय न्यायपालिका ने भी अपने न्यायिक निर्णयों के माध्यम से बदलते परिवेश के अनुरूप महिलाओं के वैवाहिक प्रास्थिति के उन्नयन में अहम भूमिका निर्वहन किया है। इस प्रकार प्रस्तुत शोध लेख में वैवाहिक अवचार के विधिक अवधारणा एवं उपचार का अध्ययन किया गया है।
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Pages:95-104
How to cite this article:
Dr. Subodh K Singh "हिन्दू पत्नी के विरूद्ध वैवाहिक अवचार एवं उपचार ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 95-104
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