Logo
International Journal of
Humanities and Social Science Research
ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
भारत में काले धन की समस्या एवं प्रभाव
Authors
डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन, डॉ. पुष्पा देवांगन
Abstract
भारतीय अर्थव्यवस्था संकट के काल से गुजर रही है। वर्तमान में जनसंख्या, बेरोजगारी, निर्धनता, मंहगाई, ग्रामीण विकास शहरीकरण तथा समानान्तर अर्थव्यवस्था, का संचालन आदि समय की चुनौतियां बन गई है। इनमें जनसंख्या वृद्धि तथा समानान्तर अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से बुरी तरह हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। यह समानान्तर अर्थव्यवस्था ही काले धन का जाल है, कुछ लोग इसे गुप्त अर्थव्यवस्था, भूमिगत अर्थव्यवस्था एवं छिपी हुई अर्थव्यवस्था भी कहते है। यह सर्वविदित है कि अरबों मात्रा में मुद्रा, आय तथा सम्पतियां बिना लेखे के है, जो कि हमारी कर प्रणाली में प्रदर्शित नहीं की जाती है, बनाई जा रही है तथा संचय की जा रही है। इस बिना लेखे की आमदनी का उपयोग वैज्ञानिक तथा गैर वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में यह काला धन कई वर्षों से पैदा हो रहा है तथा इसके विभिन्न आयाम है जो हमारी आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक जीवन को कई तरह से प्रभावित कर रहा है। वास्तव में यह काले धन की समस्या हमारी अधिकारिक मौद्रिक व्यवस्थां के लिए एक चुनौती बन गया है। तथ्य यह है कि यह काले धन की समस्या समाज के प्रत्येक क्षेत्र में तथा अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में विद्यमान है तथा कुचक्र के रूप में संचालित होता है।
Download
Pages:172-174
How to cite this article:
डॉ. बलभद्र प्रसाद देवांगन, डॉ. पुष्पा देवांगन "भारत में काले धन की समस्या एवं प्रभाव". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 172-174
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.