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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 8, ISSUE 2 (2022)
भारतीय समाजवाद के पितामहः आचार्य नरेन्द्रदेव
Authors
Nisha Kanwar
Abstract
भारतीय समाज में नए युग की चेतना व आदर्श को परिचित कराने में आचार्य नरेन्द्र देव ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका आधार राष्ट्रीयता, जनतंत्र व समाजवादी था। वे नैतिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास में आस्था रखते थे। वह आम जनता के सामान्य हित के लिए सामाजिक पुनर्गठन का समर्थन करते थे। आचार्य जी का समाजवाद पूर्णरूपेण एक नैतिक और आध्यात्मिक विशेषता लिए हुए है। वह वर्ग संघर्ष को समाजवादी दर्शन का अभिन्न अंग मानते थे। समाजवाद जहाँ शोषण से मुक्ति का आह्वान करता है, वहीं मज़दूरों से यह भी अपेक्षा करता है कि नैतिक विकास हो, यही समाजवाद की सांस्कृतिक भूमिका है। आचार्य ने समाजवाद को नए युग के शुभ सन्देश के रूप में स्वीकार किया। वह इस परमाणु युग में हिंसा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही स्तर पर समाजवादी अस्वीकार करते हैं। साथ ही वे कृषि प्रधान देश की जनता की समस्याओं का अध्ययन करते हैं। उन्होंने किसानों को समाजवादी समाज की संरचना में समान भागीदार बनने के लिए सहकारिता पर ज़ोर दिया। उन्होंने ग्राम विकास के लिए साक्षरता अभियान का समर्थन किया ताकि किसानों का विशाल जनसमुदाय समाजवादी विचारधारा से अनुप्राणित हो।
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Pages:116-119
How to cite this article:
Nisha Kanwar "भारतीय समाजवाद के पितामहः आचार्य नरेन्द्रदेव". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 8, Issue 2, 2022, Pages 116-119
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