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VOL. 8, ISSUE 3 (2022)
भारतीय संघवाद एवं इसके बदलते आयाम
Authors
सत्येंन्द्र कुमार, आशा राणा
Abstract
संघवाद, अपने मूल अर्थ में, केंद्र सरकार और क्षेत्रीय सरकारों के बीच विधायी और कार्यकारी शक्ति का विभाजन है ताकि प्रत्येक सरकार अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम कर सके। भारत जैसे देश में संघवाद अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ भिन्न भिन्न धर्मों, पृष्ठभूमियों एवं संस्कृतियों से सम्बन्ध रखने वाले लोग एक साथ रहते हैं। ऐसी स्थिति में न तो एक सरकार के लिए पूरे देश के लिए कानून बनाना संभव होगा और न ही विभिन्न संस्कृतियों, भाषा, और विविध पृष्ठभूमि वाले लागों के हित में यह वांछनीय होगा। इसलिए केंद्र सरकार भारत के पूरे और किसी भी हिस्से के लिए कानून बना सकती है और संबधित राज्य सरकारें विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार कानून बना और लागू कर सकती है। आधुनिक युग में संघवाद दो भिन्न प्रवृत्तियों, सामान्य हितों की व्यापकता और स्थानीय स्वायत्तता की आवश्यकता के बीच सामंजस्य का एक सिद्धांत है। यह शोध पत्र भारत में संघवाद की अवधारणा के साथ साथ संघवाद के बदलते आयामों की जांच करेगा। इसके अलावा, यह शोध पत्र संवैधानिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सहकारी और सहयोगी संघवाद की जरूरतों को उजागर करेगा।
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Pages:62-67
How to cite this article:
सत्येंन्द्र कुमार, आशा राणा "भारतीय संघवाद एवं इसके बदलते आयाम". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 8, Issue 3, 2022, Pages 62-67
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