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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
भारतीय समाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन के दौरान महिलाओं की स्थिति पर प्रभाव
Authors
गरिमा सिंह यादव
Abstract
इस आलेख में 19 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में भारत में हुए सामाजिक धार्मिक आंदोलन के कारण महिलाओं की स्थिति पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। परिवर्तन की इस प्रक्रिया का मुख्य आधार पुनर्जागरण था, जो कि तर्कवाद और नव चेतना पर आधारित था। सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलनों का केंद्र बिंदु महिलाएं थीं।इस लेख के माध्यम से सुधार आंदोलनों के कारणों तथा महिलाओं से जुड़ी सामाजिक कुरीतियों जैसे कि बाल विवाह, शिक्षा का अभाव, सती प्रथा, संपत्ति के अधिकारों में असमानता, बहुपत्नी प्रथा, विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबंध आदि ,जो कि महिलाओं के दोयम दर्जे के लिए जिम्मेदार थे, पर प्रकाश डाला गया।समाज सुधार आंदोलनों की नींव पुरुष सुधारकों द्वारा डाली गई तथा इनकी शुरुआत महानगरों से हुई, जिसके परिणामस्वरूप महिला संगठनों और संस्थाओं का उदय हुआ जिन्होंने भविष्य में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
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Pages:59-61
How to cite this article:
गरिमा सिंह यादव "भारतीय समाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन के दौरान महिलाओं की स्थिति पर प्रभाव". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 59-61
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