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VOL. 9, ISSUE 1 (2023)
मांडलगढ़ परगने के शिलालेखों का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
हरि लाल बलाई, डाँ. सुमन राठौड
Abstract
भारतवर्ष के राज्यो के इतिहास मे मेवाड़ का विशिष्ट स्थान रहा हेैं। मेवाड़ अपने अनुपम शौर्य व वीरता के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां की भूमि का एक एक कण स्वाभिमानी देशभक्त एवं अपनी मातृभूमि पर अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले वीरों के रक्त से रंजीत हैं। मांडलगढ़ मेवाड़ का सीमावर्ती परगना था इस में खालसा, पट्टायत एवं सांसारिक गांव आते थे। इन गांवो में विभिन्न ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्त्रोत, ताम्रपत्र, शिलालेख आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं । यदि इनका अनुसंधान पूर्वक अध्ययन किया जाए तो इतिहास लेखन में आसानी होगी । शिलालेखों ने मेवाड़ राज्य के शासकों उनकी विजयों एवं तात्कालिक राज्य आज्ञाओ की जानकारी दी है। मांडलगढ़ के ऊपरमाल के पठारी अंचल की बावडियों, दरवाजों, मंदिर व छत्त्रियांे पर विभिन्न लेख अंकित है जो मांडलगढ़ ही नहीं संपूर्ण मेवाड़ के बारे में तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करवाते हैं। मांडलगढ़ के कई शिलालेख कर्नल जेम्स टॉड अपनी मांडलगढ़ यात्रा के समय यहां से ले गए थे। बहुत से शिलालेखों को समाज कंटको ने धन के लालच में आकर नष्ट कर दिए हैं। फिर भी परगने के गांवो में कई शिलालेख मौजूद हैं जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं।
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Pages:83-85
How to cite this article:
हरि लाल बलाई, डाँ. सुमन राठौड "मांडलगढ़ परगने के शिलालेखों का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 1, 2023, Pages 83-85
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