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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
बिहार पर पृथक्करण एवं पुर्नगठन का प्रभावः एक भौगोलिक अध्ययन
Authors
संजय कुमार
Abstract
बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य है। अपने इतिहास के प्रारंभिक काल से मानवीय जीवन के सभी प्रमुख श्रेत्रों में बिहार का स्थान अत्यन्त ही प्रभावशाली रहा है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से ब्रिटेन का उपनिवेश बनने से पूर्व मुस्लिम शासन काल में बिहार का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहा। बिहार की राजनीतिक सीमाओं में 1912 से आजतक मुख्यतः चार बार राजनीतिक परिवर्त्तन किये गये हैं। 1912 के अतिरिक्त 1936, 1956 एवं वर्ष 2000 में पृथक्करण एवं पुर्नगठन से बिहार को क्षेत्रिय, सामाजिक एवं आर्थिक हानि हुई है। बिहार अब मूलतः पिछड़ी कृषि अर्थव्यवेस्था वाला प्रदेश है, जहाँ गरीबी, रोजगार के लिए पलायन औद्योगिक शून्यता के बीच जनाधिक्य की स्थिति वाला देश का सबसे पिछड़ा प्रदेश है। इस स्थिति से उबरने के लिए सरकार को दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ दीर्घ सूत्री एवं संतुलित विकास कार्यक्रम को लागू करना होगा। तभी यह राज्य प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा और पौराणिक गौरव के आसपास पहुँचेगा।
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Pages:92-95
How to cite this article:
संजय कुमार "बिहार पर पृथक्करण एवं पुर्नगठन का प्रभावः एक भौगोलिक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 92-95
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