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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
वर्तमान संदर्भ में गठबंधन की राजनीति एक अवलोकन
Authors
सुषमा कुमारी
Abstract
वर्तमान समय में गठबंधन की सरकार भारतीय लोकतंत्र की आवश्यकता एवं नियति बन गई है।गठबंधन सरकार के समकालीन परिदृश्य को देखा जाए तो जहां कुछ वर्ष पहले केंद्र और राज्य स्तर पर त्रिशंकु और कमजोर सरकार का निर्माण हो रहा था। वही विगत वर्ष कुछ वर्षों से मजबूत गठबंधन की सरकारों का निर्माण हो रहा है।
पिछले कुछ विगत 10 वर्षों में यह देखा गया है कि भारत में गठबंधन की राजनीति जो है वह अपने चरम सीमा पर है।इसका स्पष्ट उदाहरण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन है। आज जो भी सरकार बन रही है।वह मिली जुली सरकार ही बन रही है।फिर चाहे वह 2004 की डा.मनमोहन सिंह की नेतृत्व में बनी यूपीए गठबंधन हो उसमें भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ शिवसेना,द्रविड़ मुनेत्र कड़गम,भारतीय मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेश आदि की मिली जुली सरकार बनी थी।राज्य स्तर पर भी देखा जाए तो जो भी इस तरह की सरकार बनती है। उसमें भी इसी प्रकार की मिली जुली सरकार को देखा गया है।किसी भी राज्य को देखा जाए तो वहां भी इसी प्रकार की ही सरकार है।उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में जो मुख्यमंत्री का चुनाव होता है उसमें भी देख सकते हैं कि किसी को भी बहुमत नहीं प्राप्त होता है और मिली जुली सरकार ही बनानी पड़ती है।
वर्तमान समय में यह समस्या देखा जा रहा है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी अकेले अपने बदौलत बहुमत प्राप्त कर के सत्ता में नहीं आ रही है। उसे किसी भी प्रकार से अन्य पार्टियों के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनानी पड़ती है।
उपयुक्त विवरण के आधार पर यह कहा जा सकता है कि गठबंधन की राजनीति में भारतीय शासन व्यवस्था को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरीकों से प्रभावित नहीं करती बल्कि गठबंधन सरकारों से राजनीतिक व्यवस्था के नए आयामों का विकास हो रहा है।समकालीन राजनीति में गठबंधन इस प्रकार से घुलमिल गया है कि गठबंधन को अलग करके भारतीय राजनीति के विषय में सोच पाना संभव नहीं है। गठबंधन की राजनीति के महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 के आम चुनाव में प्राप्त बहुमत के बाद भी गठबंधन को यथावत रखा है गठबंधन की राजनीति में संघवाद को मजबूत किया है और इससे क्षेत्रवाद तथा अलगाववाद के मुद्दे कमजोर पड़े हैं। अगर गठबंधन की राजनीति भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नहीं होती तो भारतीय राजनीतिक व्यवस्था द्वारा बहुत पहले ही इससे पीछा छुड़ा लिया गया होता।
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Pages:74-77
How to cite this article:
सुषमा कुमारी "वर्तमान संदर्भ में गठबंधन की राजनीति एक अवलोकन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 74-77
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