ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
भारत-अमेरिका संबंधों में प्रवासी भारतीयों का योगदान
Authors
सुनीता बघेले
Abstract
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के तुरन्त बाद संसार में दो महाशक्तियों ने शीत युद्ध को जन्म दिया और विश्व को कोदो शक्ति गुटों में विभाजित कर दिया। ये दो महाशक्यिाँ थींः संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ। लगभग उसी समय जब दोनों शक्ति गुटों में शीत युद्ध ने गति पकड़ी, भारत, ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्वतन्त्र होकर, एक नवोदित राष्ट्र के रूप में उभर कर राजनीतिक क्षितिज पर प्रकाशमान हुआ। भारत ने निःसंकोच यह निर्णय किया कि वह किसी भी गुट में शमिल न होकर एक स्वतन्त्र विदेश नीति अपनाएगा। भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति इसी मूल निर्णय का परिणाम थी। इस नीति के अनुसार सभी देशों के साथ मित्रता, परन्तु गठबंधन किसी के साथ भी न करने का निर्णय लिया गया। स्वाभाविक था कि सभी के साथ मित्रता करने के प्रयास में भारत ने न केवल ब्रिटेन के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाए रखे, वरन् दोनों महाशक्तियों के साथ भी मधुर संबंध विकसित करने का प्रयत्न किया। संसार के दो विशाल लोकतान्त्रिक देश होने के नाते भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में मित्रता की अपेक्षा की गई। सामान्य रूप से इन दोनों संबंध मधुर रहे भी हैं, परन्तु कभी-कभी उनमें कटुता भी उत्पन्न हुई। किन्हीं दो स्वतन्त्र और स्वाभिमानी देशों के बीच ऐसा होना स्वाभविक भी है। इसमें संक्षेप में भारत और अमेरिका के संबंधों की समीक्षा किया गया है।
Download
Pages:78-80
How to cite this article:
सुनीता बघेले "भारत-अमेरिका संबंधों में प्रवासी भारतीयों का योगदान". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 78-80
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

