Logo
International Journal of
Humanities and Social Science Research
ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
नगरीय भूगोल की उत्पत्ति, प्रक्रिया एवं विकासः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
संजय कुमार, डॉ. मनीषा कुमारी
Abstract
नगरीय भूगोल मानव भूगोल की एक प्रमुख शाखा है। यद्यपि अधिवासों (ग्रामों और नगरों) का अध्ययन मानव भूगोल के साथ कुछ पहले से किया जाता रहा है। किन्तु एक सुनिश्चित विषय के रूप में नगरीय भूगोल की अवधारणा औद्योगिक क्रांति के पश्चात् उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक की घटना है। नगरीय भूगोल का बड़े पैमाने पर अध्ययन बीसवीं शताब्दी की देन है जो प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के पश्चात् ही संभव हो सका। 1950 के पश्चात् भूगोल के चिन्तन फलक में नवीन क्रांतिकारी मोड़ आया और भौगोलिक अध्ययनों में मात्रात्मक-गणितीय एवं सांख्किय विधियों का अधिकाधिक प्रयोग होने लगा। नगरीय भूगोल में भी मात्रात्मक उपागम प्रभावशाली होता गया और प्रतीक अध्ययनों को बाढ़ सी आ गयी। 1970 के पश्चात् समाजवादी (क्रांति परक), व्यवहारपरक तथा कल्याणपरक उपागमों के प्रयोग से नगरीय भूगोल का अध्ययन की पद्वति में उल्लेखनीय परिवर्तन परिलक्षित हुए हैं।
Download
Pages:9-10
How to cite this article:
संजय कुमार, डॉ. मनीषा कुमारी "नगरीय भूगोल की उत्पत्ति, प्रक्रिया एवं विकासः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 9-10
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.