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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
राज्य विधानमंडल के अंग के रूप में राज्यपाल की भूमिका की प्रासंगिकता
Authors
राहुल गुप्ता
Abstract
भारत की संसदीय शासन व्यवस्था के तहत केंद्र की भांति राज्यों में विधानमंडल का एक महत्वपूर्ण अंग राज्यपाल है जो राज्य में संवेधानिक प्रमुख तथा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है. राज्यपाल केंद्र तथा राज्यों के बीच एक सेतु अथवा पुल के रूप में कार्य करता है. इसे सहकारी शासन के प्रमुख अंगो में से एक माना जाता है, जिस पर हमारा लोकतंत्र गर्व करता है।
भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका के बारे में उल्लेख है. राज्य कार्यपालिका के अंतर्गत मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रिपरिषद और राज्य के महाधिवक्ता शामिल होते हैं. राज्यपाल राज्य का कार्यकारी प्रमुख होता है. भारत में राज्यपाल के पद का सृजन ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ, जहाँ सर्वप्रथम बंगाल में गवर्नर नियुक्त किया गया. वर्ष 1858 से गवर्नर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होने लगा था जब भारत ब्रिटिश क्राउन द्वारा शासित किया जाने लगा. प्रांतीय गवर्नर क्राउन के एजेंट होते थे जो गवर्नर जनरल की देखरेख में काम करते थे. वर्ष 1935 के भारत सरकार अधिनियम के बाद गवर्नर को अब प्रान्त के विधायिका के मंत्रियों की सलाह के अनुसार कार्य करना था लेकिन फिर भी विशेष उत्तरदायित्व और विवेकाधीन शक्ति उसी में निहित रही।
संविधान सभा में राज्यपाल के पद पर व्यापक रूप से बहस चली थी जिसने ब्रिटिश काल में उसकी भूमिका को बदलते हुए राज्यपाल के पद को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से अब तक राज्यपाल की भूमिका को विभिन्न सन्दर्भ में देखने के बाद उसकी भूमिका को कई अवसरों पर उसके द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के लिए सराहा गया तो वहीं कई मौकों पर उसकी भूमिका के लिए उसकी कड़ी आलोचना भी की गई. राज्यपाल की राज्य में भूमिका संवेधानिक तंत्र के सफल संचालन की रहती है जिसके लिए वह राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है. कई अवसरों पर भारत सरकार द्वारा गठित की गयीं विभिन्न समितियों तथा आयोगों ने राज्यपाल की भूमिका को लेकर तथा राज्य में संविधान मुखिया के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के सफल संचालन व क्रियान्वयन हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए जाते रहे हैं जिनका विवरण यहाँ करना आवश्यक हो जाता है।

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Pages:41-43
How to cite this article:
राहुल गुप्ता "राज्य विधानमंडल के अंग के रूप में राज्यपाल की भूमिका की प्रासंगिकता". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 41-43
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