ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
भारत में वाणिज्य शिक्षा का उद्भव प्रकृति एवं विकासः एक अध्ययन
Authors
सरिता
Abstract
वाणिज्य एवं अंग्रेजी के ‘बिजनेस’ शब्द का उद्भव ‘बिजि’ अर्थात् ‘व्यस्त’ शब्द से हुआ है। मानव सभ्यता के उदय से भी बहुत पहले मनुष्य के जीवन में वाणिज्य का प्रवेश हो चुका था। मुद्रा के प्रचलन, व्यापार के बढ़ते हुए क्षेत्र तथा मनुष्य की विविध आवश्यकताओं ने मनुष्य को वाणिज्य की ओर निकट ला खड़ा किया है। अतः राष्ट्रों में वाणिज्य शिक्षा की अत्यधिक आवश्यकता महसूस की गई है। वाणिज्य शिक्षा के द्वारा ही विकसित राष्ट्र अपने विकास की और अधिक सुदृढ़ बनाकर आगे बढ़ा सकते हैं। इसी की सहायता से विकासशील अपने विकास को आगे बढ़ा सकते हैं। वाणिज्य शिक्षा मुख्य रूप से आर्थिक शिक्षा का वह कार्यक्रम है जो धन उपलब्ध, संचय और उसे व्यय करने से संबंधित है। वाणिज्य शिक्षा, शिक्षा प्रक्रिया का वह पक्ष है जो व्यापारिक व्यवसायों की व्यवसायिक तैयारी से संबंध रखता है या वाणिज्य से संबंधित धन्धो हेतु तैयार करता है। वाणिज्य की शिक्षा, वाणिज्य की स्थापना, संचालन, संगठन तथा ऐसे ही अन्य अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं का ज्ञान प्रदान करती हैं। वाणिज्य शिक्षा एक व्यक्ति में उन मानवीय तथा व्यापारिक गुणों का सहजता के साथ विकास करती है जो एक सफल व्यापारी में होने चाहिए। वाणिज्य शिक्षा से ही कोई व्यक्ति कुशल व्यापारी बन पाता है।
Download
Pages:12-13
How to cite this article:
सरिता "भारत में वाणिज्य शिक्षा का उद्भव प्रकृति एवं विकासः एक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 12-13
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

