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VOL. 9, ISSUE 5 (2023)
सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महिलाओं की भूमिकाः एक अध्ययन
Authors
डॉ॰ संगीता
Abstract
19वीं सदी का उत्तरार्द्ध वह समय था, जब समाज के सभी समूहों ने अपने आप को एक भारतीय राष्ट्र का हिस्सा मानकर स्वराज की प्राप्ति के लिए संघर्ष किया। हालांकि उससे पहले भी ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध काफी विद्रोह सामने आए थे, परंतु 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना एक ऐसा मील का पत्थर साबित हुई जिसने भारतीय राष्ट्रवाद को मजबूत मंच प्रदान किया। गांधी जैसे नेता की अगुवाई ने स्वतंत्रता संघर्ष को सभी वर्गो व जातियों के लिए एक सार्वजनिक कृत्य बना दिया। आजादी की लड़ाई के विभिन्न चरणों जैसे स्वदेशी आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन में महिलाओं की भागीदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका में रही है। इन चरणों में विभिन्न समुदायों और वर्गों की महिलाओं ने भारी संख्या में भाग लिया। उन्होंने न केवल राष्ट्रीय आन्दोलन को संख्यात्मक दृष्टि से मजबूत बनाया, बल्कि उसमें महिलाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों और प्रश्न भी साथ लेकर आई। महिलाओं के राजनीतिकरण की यह प्रक्रिया इतनी सहजता से हुई कि उन्हें पुरूष सरंक्षकों की भी सराहना प्राप्त हुई। जिस प्रकार पूजा में शक्ति का आह्वान किया जाता है और स्त्री शक्ति का प्रतीक मानी गई है इसलिए महिलाओं को शक्ति का रूप मानकर राष्ट्रीय आंदोलन में शमिल किया गया।
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Pages:28-29
How to cite this article:
डॉ॰ संगीता "सविनय अवज्ञा आन्दोलन में महिलाओं की भूमिकाः एक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 5, 2023, Pages 28-29
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