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VOL. 9, ISSUE 6 (2023)
भारत में उर्वरकों के उपभोग की प्रवत्ति (पंजाब व राजस्थान राज्य का तुलनात्मक अध्ययन)
Authors
हरदान राम
Abstract
भारत में सामान्य रूप से यह स्वीकार किया जाने वाला तथ्य है कि देश को कृषि क्षेत्र में विशेषतौर से खाद्यानों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में हरित क्रांति की सबसे बड़ी भूमिका रही है हरित क्रांति कृषि क्षेत्र हेतु एक रणनीति थी जिसमें कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले आगतों में परिवर्तन करना था इसमें से एक प्रमुख आगत उर्वरक थे। उर्वरकों के उपयोग ने देश में कृषि की उत्पादकता में बहुत अधिक वृद्धि करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन देश में उर्वरकों के उपयोग में बहुत अधिक असमानता पाई जा रही है एक तरफ पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में उर्वरकों का अति उपयोग हो रहा है तो दूसरी तरफ राजस्थान, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में उर्वरकों का उपयोग राष्ट्रीय स्तर के औसत से कम हो रहा है। भारत में उर्वरकों की उपलबध्ता में कमी और सरकार के द्वारा नाइट्रोजन (उरिया) पर अधिक सब्सिडी के कारण NPK अनुपात संतुलित अनुपात 4:2:1 से बहुत अधिक असंतुलित हो गया है जिसके कारण कृषि के विकास पर दीर्घकाल में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस आलेख में भारत में वर्तमान में उर्वरकों के उपभोग की स्थिति को स्पष्ट किया गया है तथा पंजाब और राजस्थान राज्य में 1966 से 2020 तक की अवधि में उर्वरकों के उपभोग की प्रवत्ति और उपभोग में पाए जाने वाले अंतर की सार्थकता का विश्लेषण सांख्यिकी विधियों की सहायता से किया गया है तथा आलेख के अंत में उर्वरकों के उचित उपयोग को बढ़ावा देने हेतु सुझाव दिए गए है।
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Pages:32-36
How to cite this article:
हरदान राम "भारत में उर्वरकों के उपभोग की प्रवत्ति (पंजाब व राजस्थान राज्य का तुलनात्मक अध्ययन)". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 9, Issue 6, 2023, Pages 32-36
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