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VOL. 10, ISSUE 2 (2024)
भारत की दक्षिण एशिया नीतिः 2014-2023
Authors
डॉ. करुणा कुमारी
Abstract
विष्व की 3.5 प्रतिशत भूमि और लगभग एक-चौथाई जनसंख्या के साथ दक्षिण एशिया, अंतरराष्ट्रीय विकास मंच पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके देशों की भौगोलिक समीपता और सामाजिक-सांस्कृतिक साम्य के बावजूद इनमें बहुत ही कम समन्वय है। ये देश विष्व व्यापार की तुलना में मात्र 5 प्रतिशत का व्यापार अपने निकट देशों के साथ करते हैं। पूरे क्षेत्र के वैष्विक निवेश को देखें, तो उसका केवल एक प्रतिशत निवेश, ये आसपास के देशों में करते हैं। वैष्विक औसत की तुलना में दक्षिण एशियाई देशों का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद मात्र 9.64 प्रतिशत है। विष्व की 30 प्रतिशत गरीबी इस क्षेत्र में है। इस क्षेत्र के लिए अनेक आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियाँ है।
इस क्षेत्र के देश आर्थिक विकास की समान चुनातियों का सामना करते हैं। इसके बावजूद इनके बीच सहयोग बहुत कम है। इस मामले में बिम्सटेक और बीबीआईएन ही दो ऐसे उपक्रम हैं, जिन्हें देशों को आर्थिक और सामाजिक रूप से एक दूसरे के नजदीक लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इन देशों में असमानता, गरीबी, कमजोर प्रशासन और ढांचों की कमी से जुड़ी समान समस्याएं हैं, जो 2030 के धारणीय विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिए सहयोग, समन्वय और समानता की मांग करती है। अधिकतर दक्षिण एशियाई देशों ने गरीबी को कम करने में अच्छी प्रगति की है, परन्तु उद्योग, नवाचार, बुनियादी ढांचा, भुखमरी, लैंगिक समानता, शिक्षा, रोजगार, नगरों के विकास आदि क्षेत्रों में वे अभी भी अनेक पहलुओं पर पीछे हैं। ये देश जलवायु परिवर्तन और उससे जन्मी प्राकृतिक आपदाओं के निशाने पर भी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के द्वितीय कार्यकाल के प्रारंभ में ही सरकार ने ‘पड़ोसी पहले‘ की अपनी नीति का परिचय देना शुरू कर दिया है। फर्क सिर्फ इतना है कि 2014 में जहाँ सार्क देशों के प्रमुखों को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था, वहीं इस बार बंगाल की खाड़ी से जुड़े बिम्सटेक समूह देश के प्रमुखों को बुलाया गया। बिम्सटेक (ठप्डैज्म्ब्) यानि बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाइलैण्ड। इस समूह में चार देश ऐसे हैं, जो सार्क के भी सदस्य हैं। सरकार की इस प्रारंभिक नीति का अर्थ यह कदापि नहीं लगाया जाना चाहिए कि भारत ने सार्क के विकल्प के रूप में बिम्सटेक को चुन लिया है। भारत के लिए सार्क देशों का अलग महत्व है, और इसे देखा-समझा जाना भी आवश्यक है। भारत सरकार की दक्षिण एशिया नीति वर्ष 2014 के बाद परिवर्तित हुई है।
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Pages:35-39
How to cite this article:
डॉ. करुणा कुमारी "भारत की दक्षिण एशिया नीतिः 2014-2023". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 2, 2024, Pages 35-39
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