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VOL. 10, ISSUE 3 (2024)
प्राचीन जल-प्रबन्धन उपायों का जोधपुर के विशेष संदर्भ में विष्लेषण
Authors
आसुराम डऊकिया
Abstract
सृष्टि के प्रारम्भ से ही लोग नदियांे, झरनों एवं पानी के भराव के आसपास के स्थानों पर रहते आये थे और वहीं पर उत्पन्न होने वाले फल-फूलों पर अपना जीवन-निर्वाह करते थे। बाद में वे लोग नदियों, झरनों और पोखरों से नलियाँ निकालकर खेती करने लगे। वर्षा के बाद नदी-नालों का पानी कम होने पर उन्होंने अपनी फसल को पानी देने के लिए नदियों में पानी रोकना शुरू किया, जिससे कुछ समय के लिए उनको पानी उपलब्ध हो जाता था। खेती सम्बन्धी ज्ञान बढ़ने पर नदियों के किनारें कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया गया, जोधपुर नगर सहित गांव-गांव में वर्षा की एक-एक बूंद को सहेजकर रखने के तरीके को उतरोत्तर खोजे एवं जगह-जगह उनको बनानें का बहुत ही व्यावहारिक, व्यवस्थित और विशाल संगठन खड़ा किया। इनके निर्माण की तकनीकी में उतरोत्तर विकास होता गया। जोधपुर जैसे शहर में सदियों से वर्षा के पानी की एक-एक बूंद का संग्रह करने के लिए उच्च कोटि की तकनीकों से नहरों का निर्माण कर जमीन के नीचे, उसके ऊपर साईफन से 20 फीट ऊॅंची दीवारों पर मेहराब बनाकर और बहुत सी जगह पहाड़ों में 20-30 फीट गहरी एवं 20 फीट चौड़ी खाइयां खोदकर सिर्फ ढलान से शहर में पानी उपलब्ध कराया जाता था।
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Pages:22-24
How to cite this article:
आसुराम डऊकिया "प्राचीन जल-प्रबन्धन उपायों का जोधपुर के विशेष संदर्भ में विष्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 3, 2024, Pages 22-24
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