Logo
International Journal of
Humanities and Social Science Research
ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
सॉची का महान स्तूपः एक अवलोकन
Authors
अचलाराम
Abstract
बौद्ध स्मारको के लिए प्रसिद्ध सांची का पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ठ महत्व है। यहां स्थित स्पूत, मंदिर, स्तम्भ, विहार, चैत्यालय इस बात का प्रमाण है कि प्राचीनकाल में सांची बौद्ध धर्म के प्रचार एवं शिक्षा का प्रमूख केन्द्र था। शुरूआती बौद्ध कला की सवार्ते म निधियॉ सांची से ही प्राप्त होती है। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सॉची भोपाल से लगभग 46 कि. मीतथा रायसेन से 23 कि.मी. और विदिशा से 10 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। सांची स्थित पहाड़ी को पुरातनकाल में बैदिशगिरी, चैतियागिरी, काकनाय इत्यादि नामा से पुकारा जाता था। सांची स्थित पहाड़ी के आसपास का परिदृश्य मन को लुभाता है। सदी के प्ररम्भिक अभिलेखो में सांची का नाम काकणाय, काकणादबोट, और सातवी सदी ईस्वी के अभिलेखों में वोटश्रीपर्वत उल्लेखित है। सांची में पुराने स्मारको के निर्माण का श्रेय मौर्य सम्राट अशोक को जाता है। यहां स्थित स्पूत, स्तम्भ, विहार, मंदिर, चेत्य, इत्यादि का निर्माण तीसरी सदी ईसा पूर्व से बाहरवी सदी ईस्वी तक निरन्तर जारी रहां
Download
Pages:1-2
How to cite this article:
अचलाराम "सॉची का महान स्तूपः एक अवलोकन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 1-2
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.