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VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
भारतीय संस्कृति की सामान्य विषेशताऐं तथा आधुनिकीकरण के प्रभाव क्षेत्र (ग्रामीण महिलाओं के सन्दर्भ में)
Authors
लक्ष्मी नारायण अग्रवाल
Abstract
संस्क्ति का उद्भव एंव विकास मानव के मध्य ही होता है फिर भी संस्कृति निर्माण की क्षमताएं मनुष्य को प्रकृति से ही मिलती है और वह इस अर्थ में कि मानव को प्रकृति कुछ इस प्रकार से ही मिलती है और वह इस अर्थ में कि मानव को प्रकृति कुछ इस प्रकार की शारीरिक तथा मानसिक विषेशताएं व क्षमताएं प्राप्त हैं जिनके सम्मिलित उपयोग से संस्कृति-निर्माण के रूप में प्रतिष्ठित करने में मानव की भाशा तक प्रतीकों के माध्यम से आदान-प्रदान कर क्षमता सर्वप्रमुख है किन्तु फिर भी मानव ही प्रतीकों को जन्म देता है तथा उन्हें अर्थयुक्त करता है। मानव ही भाशा के माध्यम से ज्ञान-विज्ञान के भण्डार को भरता है। मानव तथा पशु में सबसे महत्वपूर्ण अन्तर भाषा का ही है। भाषा के न होने पर पशुओं मे ज्ञान व संस्कृति का पूर्ण अभाव होता है। मानव ज्ञान के आधार पर ही सॉंस्कृतिक तत्वों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तान्तरित करता है। मानव के द्वारा ही नवीन सांस्कृति तत्वों का जन्म, सांस्कृतिक व्यवस्था की स्थिरता तथा सॉंस्कृतिक निरन्तरता सम्मव होती है। अतः संस्कृति के निर्माण, विकास, परिवर्तन तथा विस्तार में भाशा व प्रतीकों (सांस्कृतिक तत्वों) का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
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Pages:29-32
How to cite this article:
लक्ष्मी नारायण अग्रवाल "भारतीय संस्कृति की सामान्य विषेशताऐं तथा आधुनिकीकरण के प्रभाव क्षेत्र (ग्रामीण महिलाओं के सन्दर्भ में)". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 29-32
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