ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 4 (2024)
18वीं शताब्दी के रुहेलखण्ड में रुहेला राज्य की राजस्व व्यवस्था
Authors
डॉ. सुधीर कुमार वर्मा
Abstract
मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ ही मध्य एशियाई क्षेत्रों से अफगानों का प्रवास प्रारंभ हो गया था। अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक उत्तर भारत के कटेहर क्षेत्र पर रुहेला अफगानों का आधिपत्य स्थापित हो गया। परिणामतः यह क्षेत्र रुहेलखण्ड के नाम से जाना जाने लगा। यहाँ पर स्थापित होने वाले रुहेला अफगान राज्य की अपनी कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक महत्ता रही थी प्रस्तुत शोध पत्र रुहेला राज्य की आर्थिक परिस्थितियों के परीक्षण के संदर्भ में समकालीन क्षेत्रीय राजस्व व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करता है।
सर्वप्रथम रुहेलों की राजस्व व्यवस्था से संबंधित यह प्रश्न उपस्थित होता है कि रुहेला अफगानों ने अपने नियंत्रण के दौरान यहाँ पर पूर्व स्थापित कृषि-संबंधों एवं राजस्व व्यवस्था में क्या परिवर्तन किए? रुहेलों के नियंत्रण से पूर्व यहाँ एक अराजकता की स्थिति थी। मुगल बादशाहों द्वारा अपने मनसबदारों को इस क्षेत्र में जागीरें प्रदान की गई थी परंतु ये जागीरदार अपने नाईब (प्रतिनिधि) के माध्यम से इन जागीरों का प्रबंधन करते थे। इस व्यवस्था ने रुहेलखण्ड में और अधिक अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर दी क्योंकि इन नाईबों का मुख्य बल अधिकाधिक राजस्व वसूली पर था, न कि कृषकों को किसी प्रकार की सहायता प्रदान करने पर था। ये अपने क्षेत्र में स्वतन्त्र हैसियत से व्यवहार कर अधिकाधिक राजस्व की वसूली करने लगे थे, जिससे किसानों की स्थिति में और गिरावट आई।1
Download
Pages:21-23
How to cite this article:
डॉ. सुधीर कुमार वर्मा "18वीं शताब्दी के रुहेलखण्ड में रुहेला राज्य की राजस्व व्यवस्था". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 4, 2024, Pages 21-23
Pdf, Certificate, Cover Page, Index Page, Editorial Page, Accept Letter
Please enter the email address corresponding to this article submission.

