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VOL. 10, ISSUE 5 (2024)
ग्रामीण बिहार में महिला सशक्तिकरण में कुटीर एवं लघु उधोग की भूमिका: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ
Authors
शीलु कुमारी
Abstract
किसी भी देश के विकास में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है। सामाजिक, आर्थिक विकास की अवधारणा महिलाओं के विकास के बिना अधूरी है। यदि देश को सभी क्षेत्रों में विकास करना है तो महिलाओं का उत्थान करना होगा। महिलाओं के विकास से देश का आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास स्वतरू हो जाएगा। हमारा देश गाँवों का देश है जिसमें आधी आबादी महिलाओं की है। ग्रामीण महिलाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना बहुत आवश्यक है। इस संदर्भ में महिला उधमिता ग्रामीण और शहरी ग़रीबी की समस्या के समाधान की कारगर रणनीति के रूप में देखा जाने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मज़बूती के लिए महिला उधमियों की संख्या में वृद्धि आवश्यक है। महिला उधमी अन्य महिलाओं को भी कारोबार शुरू करने के लिए प्रेरित करती है। इससे महिलाओं के के लिए और भी अधिक संख्या में रोज़गार के अवसर उत्पन्न होते हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव महिला-पुरुष असमानता को कम करने में मदद मिलती है। महिला उधमिता से परिवार और समाज में आर्थिक ख़ुशहाली लाने, ग़रीबी कम करने और महिला सशक्तिकरण में मदद मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर एवं लघु उधोगों के माध्यम से महल उधमिता को बढ़ावा दिया जा सकता है। कुटीर उधोगों एवं लघु उधोगों में बहुत कम राशि, कम कौशल इत्यादि की आवश्यकता पड़ती है। इसका प्रभाव ऋंखला अभिक्रिया की तरह होता है यानी कि कुछ महिला उधमिता के तैयार होने पर बहुत सारी महिलाओं को रोज़गार मिलता है।
बिहार के कोसी क्षेत्रों में बाढ़ एवं ग़रीबी के कारण लोगों का पलायन दूसरे विकसित राज्यों में बहुत तेजी से हुआ है। ऐसी परिस्थिति में इस क्षेत्र में महिला श्रमबल अधिक है। कोसी क्षेत्र में कुटीर एवं लघु उधोग में कम पूँजी निवेश से अधिक उत्पादन और अधिक रोज़गार सृजन किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कुटीर उधोगों में अगरबत्ती उधोग, पापड़ उधोग, मोमबती उधोग, हस्तकरघा उधोग, बाँस से निर्मित सामानों का उधोग, मिट्टी के बर्तन निर्माण उधोग इत्यादि की बहुत संभावना है। वहीं लघु उधोग में चमड़ा उधोग, कांस्य वस्तु निर्माण, डेयरी उधोग, क़ालीन उधोग इत्यादि की संभावना बहुत अधिक है। कुटीर एवं लघु उधोग के संचालित करने में कुछ चुनौतियाँ भी है। इन चुनौतियों में पूँजी निवेश, बाज़ार, बीमा, भंडारण, सब्सिडी, बैंक से ऋण की समस्या, परिवहन, माल ढुलाई में ख़र्चा, डिजिटल बाज़ार से वंचित होना, कुशल श्रमशक्ति का न होना, उरानी तकनीक, बुनियादी ढाँचे की कमी इत्यादि है।
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Pages:14-17
How to cite this article:
शीलु कुमारी "ग्रामीण बिहार में महिला सशक्तिकरण में कुटीर एवं लघु उधोग की भूमिका: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 5, 2024, Pages 14-17
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