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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 10, ISSUE 5 (2024)
समान कार्य के लिए समान वेतन की ओरः औपनिवेशिक तमिलनाडु की कपास मिलों में वेतन में विवाद का इतिहास
Authors
शिखा प्रकाष, एम. वी. शोभना वारियर
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र औपनिवेशिक काल के दौरान तमिलनाडु की कपास मिलों में श्रमिकों के मजदूरी विवादों और समान काम के लिए समान वेतन की अवधारणा के विकास की समीक्षा करता है। तमिलनाडु में कपास उद्योग ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के तहत एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहाँँ श्रमिकों की स्थिति और मजदूरी नीति पर कई विवाद और संघर्ष हुए। औपनिवेशिक शासन के तहत श्रमिकों पर न्यूनतम मजदूरी और काम करने की स्थिति का भुगतान करने का दबाव था। पुरुष और महिला श्रमिकों के बीच मजदूरी भेदभाव, जातिगत भेदभाव और विदेशी मालिकों के अधीन शोषण प्रमुख मुद्दे थे। इसके परिणामस्वरूप कपास मिलों में मजदूरी और श्रम अधिकारों को लेकर कई आंदोलन और संघर्ष हुए।
यह शोध पत्र इन आंदोलनों के ऐतिहासिक संदर्भ में समान वेतन, अवधारणा, व भूमिका की जाँच करता है। आरंभिक 20वी शताब्दी में दक्षिण भारत की वस्त्र मिलों में महिला श्रमिकों की वेतन असमानता, कार्य क्षेत्र में उचित कार्य परिस्थितियों की मांग, श्रम संगठनों के प्रयासों, कल्याणकारी अधिनियमों की रचना का आंकलन किया गया हैं। यह इस बात का भी विश्लेषण करता है कि औपनिवेशिक शासन के तहत मजदूर वर्ग की असमान स्थिति के खिलाफ आवाज उठाने वाले आंदोलन साम्राज्यवादी शोषण और आर्थिक असमानता को चुनौती देने का प्रयास कैसे थे। इस शोध का उद्देश्य यह समझना है कि औपनिवेशिक मिलों में काम करने वाले श्रमिकों का वेतन संघर्ष किस प्रकार भारतीय श्रमिक आंदोलनों की नींव बन गया और बाद में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गया।
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Pages:58-63
How to cite this article:
शिखा प्रकाष, एम. वी. शोभना वारियर "समान कार्य के लिए समान वेतन की ओरः औपनिवेशिक तमिलनाडु की कपास मिलों में वेतन में विवाद का इतिहास". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 10, Issue 5, 2024, Pages 58-63
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