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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 1 (2025)
सीकर ठिकाने एवं जयपुर राज्य के मध्य 1938 का संघर्ष
Authors
कुलदीप
Abstract
सीकर व जयपुर के मध्य हुई इस संघर्ष से हमें पता चलता है कि किस प्रकार एक बड़ी मछली छोटी मछली को खाने के लिये हमेशा आतुर रहती थी यहीं बात हमें इस संघर्ष में दिखाई देती है। जयपुर राज्य सीकर पर अपना आर्थिक नियंत्रण स्थापित करना चाहता था क्योंकि सीकर ठिकाने का क्षेत्रफल बहुत बड़ा था तथा आर्थिक रूप से बहुत ही उपयोगी था इसलिए जयपुर राज्य इस पर अधिकार कर यहाँ के आर्थिक साधनों पर नियंत्रण स्थापित कर अपनी आय के साधन बढ़ाना चाहता था इसलिए उसने एक चाल चली जिसका मोहरा सीकर रावराजा के पुत्र को बनाया तथा अनावश्यक रूप से ही सीकर पर आक्रमण कर दिया जिसके कारण कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा तथा कईयों को गिरफ्तार किया गया जिन्हें लम्बी यातनाएँ सहन करनी पड़ी लेकिन फिर भी यहाँ की जनता ने रावराजा का भरपुर सहयोग किया। महाराजा जयपुर ने चार माह तक पुलिस के कड़े पहरे में सीकर को रखा। आखिर रावराजा सीकर को दबना पड़ा व महाराजा जयपुर की संधि स्वीकार करनी पड़ी और अपने शासनाधिकारों से वंचित होना पड़ा।
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Pages:57-62
How to cite this article:
कुलदीप "सीकर ठिकाने एवं जयपुर राज्य के मध्य 1938 का संघर्ष". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 1, 2025, Pages 57-62
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