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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
भारतीय निर्वाचन प्रणाली: दशा एवं दिशा
Authors
डॉ. नरेन्द्र सिंह, डॉ. शक्ति गुप्ता
Abstract
1935 के अधिनियम के द्वारा मताधिकार को पहले से अधिक विस्तृत बना दिया गया था जिस कारण प्रान्तीय विधानसभाओं के लिए लगभग 14 प्रतिशत जनता को मताधिकार प्राप्त हो गया था लेकिन साथ ही साथ साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का पहले से अधिक विस्तार कर दिया गया था। 1935 के भारतीय शासन अधिनियम की योजना का संधीय भाग कभी कार्य रूप में परिणित नहीं किया जा सका क्योंकि देशी राज्यों के नरेशों ने संघ योजना को अस्वीकार कर दिया। कांग्रेस ने भी न केवल अधिनियम की संघीय योजना को ठुकरा दिया बल्कि भारत के भावी संविधान का निर्माण करने के लिए एक संविधान सभा की मांग की। जिसके परिणाम स्वरूप 1946 में कैबिनेट मिशन योजना अस्तित्त्व में आयी जिसमें भारत के भावी शासन व्यवस्था चुनाव प्रणाली आदि की चर्चा की गयी थी।
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Pages:102-104
How to cite this article:
डॉ. नरेन्द्र सिंह, डॉ. शक्ति गुप्ता "भारतीय निर्वाचन प्रणाली: दशा एवं दिशा". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 102-104
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