विश्व के 60% से
अधिक समुद्री व्यापार का इस क्षेत्र से होकर गुजरना और भू-रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता
के केंद्र के रूप में कार्य करने के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र (जो हिंद महासागर एवं
प्रशांत महासागर में फैला हुआ है) एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक रंगमंच बना हुआ है।
इस अध्ययन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की गतिशीलता की जांच की
गई है, जिसमें दो शक्तिशाली उभरते राष्ट्र भारत और चीन के बीच
बदलती गतिशीलता पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह क्वाड और आसियान जैसे
अंतर्राष्ट्रीय मंचों में उनकी अपनी भागीदारी के साथ-साथ उनके रणनीतिक लक्ष्यों,
नौसेना के आधुनिकीकरण एवं समुद्री नीतियों की भी जांच करता है।
जिसमे भारत की 2015 की सामुद्रिक सुरक्षा रणनीति और चीन के 2019 के रक्षा श्वेत
पत्र जैसे सरकारी नीति जैसी प्राथमिक सामग्रियों के अलावा अकादमिक पत्रिकाओं एवं थिंक
टैंक जैसे माध्यमिक स्रोतों से परामर्श करता है। जिसके परिणाम दर्शाते हैं कि चीन
का बलपूर्वक समुद्री विस्तार जिसमे विशेष रूप से बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)
के माध्यम से और भारत का एक्ट ईस्ट पॉलिसी के माध्यम से प्रतिसंतुलन
रणनीति, विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) जैसे हॉटस्पॉट में एक गतिशील प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बन गई है। हालांकि
यहाँ पर अवैध मछली पकड़ने, समुद्री डकैती और जलवायु से
संबंधित समुद्री खतरों सहित आम मुद्दों के कारण सहयोग के अवसर भी उपलब्ध हैं। इस
लेख में क्षेत्रीय गठबंधनों और नौसैनिक असंतुलन के परिणामों की जांच की गई है तथा
तनाव बढ़ने के खतरों के परिणाम को कम करने की प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया
गया है। यह बहुपक्षीय सहयोग, द्विपक्षीय चर्चाओं और
विश्वास-निर्माण पहलों के माध्यम से स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुझावों
के साथ समाप्त होता है। इसका लक्ष्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र मे समुद्री वातावरण की
सुरक्षा की गारंटी के लिए भारत और चीन के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन
बनाना है।
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