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VOL. 11, ISSUE 4 (2025)
भारतीय प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में ए0आई0
Authors
पंकज कुमार, आदित्य कुमार
Abstract
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शुरूआत 1950 के दशक से हुई थी। ‘‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1956 में जॉन मैक्कार्थी ने किया था।’ सामान्य शब्दों में कहें तो इसका अर्थ हो गया बनावटी तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता। इसके द्वारा कम्प्यूटर सिस्टम को इस प्रकार बनाया जाता है कि वे वैसे ही काम करें जिस प्रकार मानव मस्तिष्क काम करता है। ए0आई0 के जनक जॉन मैक्कार्थी के अनुसार ‘‘यह बुद्धिमान मशीनों, विशेष रूप से बुद्धिमान कम्प्यूटर प्रोग्राम को बनाने का विज्ञान और अभियांत्रिकी है अर्थात् यह मशीनों द्वारा प्रदर्शित किया गया इंटेलिजेंस है। यह इस बात का अध्ययन करता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है और समस्या को हल करते समय कैसे निर्णय लेता है या कैसे काम करता है। इसके महत्ता को 1970 के दशक से धीरे-धीरे पहचान मिलना शुरू हो गई एवं जापान ने सबसे पहले इस पर काम किया तथा 1981 में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरूआत की जिसमें सुपर-कम्प्यूटर के विकास के लिए 10 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। इसके पश्चात दुनिया के अन्य देशों ने भी इस तरफ ध्यान देना प्रारम्भ किया। ब्रिटेन ने इसके लिए ‘एल्वी’ नामक प्रोजेक्ट बनाया। यूरोपीय संघ के देशों ने भी ‘एस्प्रिट’ नाम से कार्यक्रम शुरू किया।
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Pages:161-165
How to cite this article:
पंकज कुमार, आदित्य कुमार "भारतीय प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में ए0आई0". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 4, 2025, Pages 161-165
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