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VOL. 11, ISSUE 5 (2025)
कंदरिया महादेव मंदिर: नागर वास्तुकला का चरमोत्कर्ष - एक वास्तुगत एवं कला-ऐतिहासिक विश्लेषण
Authors
संजय कुमार यादव
Abstract
यह शोध पत्र मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित कंदरिया महादेव मंदिर का एक व्यापक वास्तुशिल्प और कला-ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह मंदिर चंदेल राजवंश के संरक्षण में, विशेष रूप से राजा विद्याधर द्वारा लगभग 1025-1050 ईस्वी में निर्मित, नागर शैली की वास्तुकला के चरमोत्कर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। कई विद्वान इसे महमूद गजनवी पर विद्याधर की सैन्य विजय के उपलक्ष्य में बनाया गया एक विजय स्मारक मानते हैं। वास्तुशिल्प की दृष्टि से, मंदिर नागर शैली के सिद्धांतों का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें एक ऊँचा मंच (जगती), एक अक्षीय योजना (अर्धमंडप, मंडप, महामंडप से गर्भगृह तक), और एक भव्य शिखर शामिल है। इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता इसका जटिल शिखर है, जो कैलाश पर्वत का प्रतीक है और 84 छोटे सहायक शिखरों (उरुशृंगों) से घिरा हुआ है, जो एक अद्भुत दृश्य बनाता है। मंदिर की श्सप्तरथश् योजना और श्सांधारश् (आंतरिक प्रदक्षिणा पथ) डिजाइन इसकी विकसित शैली को दर्शाते हैं। मंदिर का मूर्तिकला कार्यक्रम भी उतना ही प्रभावशाली है, जिसमें लगभग 900 मूर्तियाँ हैं जो इसकी हर सतह को सुशोभित करती हैं। इन मूर्तियों को एक पदानुक्रम में व्यवस्थित किया गया हैरू आधार पर धर्मनिरपेक्ष जीवन के दृश्य, और दीवारों पर देवता, अप्सराएँ, पौराणिक जीव (व्याल), और प्रसिद्ध मिथुन (कामुक युगल)। ये मिथुन मूर्तियाँ, जो कुल मूर्तियों का एक छोटा हिस्सा हैं, मानव जीवन के चार लक्ष्यों (पुरुषार्थों) में से एक श्कामश् का प्रतिनिधित्व करती हैं या तांत्रिक दर्शन को दर्शाती हैं। अंततः, कंदरिया महादेव मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि चंदेलों की शक्ति, कलात्मक प्रतिभा और एक एकीकृत हिंदू विश्वदृष्टि का एक स्थायी प्रमाण है, जो इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में एक अमूल्य सांस्कृतिक विरासत बनाता है।
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Pages:93-96
How to cite this article:
संजय कुमार यादव "कंदरिया महादेव मंदिर: नागर वास्तुकला का चरमोत्कर्ष - एक वास्तुगत एवं कला-ऐतिहासिक विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 5, 2025, Pages 93-96
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