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VOL. 11, ISSUE 5 (2025)
प्राथमिक शाला में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल में सुधार के लिए विभिन्न रणनीतियां पर शोध
Authors
बलदाऊ सिंह श्याम
Abstract
प्राथमिक शिक्षा किसी भी देश की शैक्षिक प्रणाली की आधारशिला होती है। इस स्तर पर बच्चों में पढ़ने, लिखने और गणना करने की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही कौशल आगे की शिक्षा तथा जीवन के समग्र विकास का आधार बनते हैं। भारत में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल (Foundational Literacy and Numeracy — FLN) को सुदृढ़ करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, जिनमें निपुण भारत मिशन (2021), समग्र शिक्षा अभियान, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा 3 तक प्रत्येक बच्चा पढ़ने और गणना करने की न्यूनतम अपेक्षित योग्यता प्राप्त कर ले। इस शोध में यह पाया गया कि आधारभूत साक्षरता और अंकज्ञान की समस्या मुख्यतः ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में अधिक गहराई से विद्यमान है। इसका कारण प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, शिक्षण सामग्री का अभाव, भाषा संबंधी बाधाएँ, तथा घर-विद्यालय के बीच संवाद की कमी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई जा रही हैं, जैसे— सक्रिय एवं बालक-केंद्रित शिक्षण पद्धतियाँ, प्रोजेक्ट आधारित अधिगम, तकनीकी उपकरणों (ICT) का उपयोग, मल्टीलिंगुअल दृष्टिकोण, और समुदाय की भागीदारी। शिक्षक प्रशिक्षण को भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण घटक माना गया है, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके। शोध के निष्कर्ष से स्पष्ट होता है कि गुणवत्तापूर्ण आधारभूत शिक्षा न केवल शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाती है, बल्कि यह बच्चों में आत्मविश्वास, तार्किक सोच और समस्या-समाधान क्षमता का भी विकास करती है। यदि प्राथमिक स्तर पर साक्षरता और अंकज्ञान की मजबूत नींव रखी जाए, तो भविष्य में ड्रॉपआउट दरों में कमी, रोजगार योग्यता में वृद्धि, और राष्ट्र की समग्र प्रगति संभव है। अतः यह आवश्यक है कि नीति निर्माताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के सामूहिक प्रयासों से प्राथमिक शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, समावेशी और परिणाममुखी बनाया जाए।
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Pages:164-168
How to cite this article:
बलदाऊ सिंह श्याम "प्राथमिक शाला में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल में सुधार के लिए विभिन्न रणनीतियां पर शोध". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 5, 2025, Pages 164-168
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