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VOL. 11, ISSUE 6 (2025)
तुलसीदास तथा भारतीय आध्यात्मिकता: भक्ति, करुणा एवं मोक्ष की अवधारणाओं का विश्लेषण
Authors
विशाल प्रताप मित्र
Abstract
प्रस्तुत लेख तुलसीदास की आध्यात्मिक चिंतन-परंपरा का
विश्लेषण करते हुए भक्ति, करुणा एवं मोक्ष की उन अवधारणाओं को समझने का प्रयत्न करता है जिन्होंने भारतीय धार्मिक
चेतना, सामाजिक नैतिकता तथा
व्यक्तिगत आत्मविकास की दिशाओं को गहनता से प्रभावित किया है। रामचरितमानस में
प्रतिपादित भक्ति केवल ईश्वर-समर्पण का मार्ग मात्र नहीं अपितु वह व्यक्ति को भीतर
से रूपांतरित करके उसके व्यवहार नैतिक संकल्पों और सामाजिक उत्तरदायित्वों को नया
आकार भी देती है। इसी प्रकार करुणा जो तुलसीदास के काव्य और दर्शन का केंद्रीय तत्व है, मानवता की आधारशिला के
रूप में प्रस्तुत होती है तथा समाज में दया, सहानुभूति एवं परस्पर सहयोग की संस्कृति को विकसित
करती है। मोक्ष के संबंध में तुलसीदास का दृष्टिकोण शुद्ध दार्शनिक विमर्श न होकर
एक व्यवहारिक जीवन-दर्शन के रूप में उभरता है जिसमें भक्ति, कर्म, धर्म एवं अंतःशुद्धि
एक-दूसरे के पूरक रूप में दिखाई देते हैं। यह लेख दिखाता है कि तुलसीदास की
आध्यात्मिकता न केवल भक्तिकालीन समाज की आवश्यकताओं को व्यक्त करती थी बल्कि आधुनिक जीवन के
तनाव, मूल्य-संकट, आध्यात्मिक
रिक्तता के संदर्भ में भी अत्यंत प्रासंगिक बनी हुई है। इस प्रकार यह लेख तुलसीदास
के चिंतन को समकालीन भारतीय समाज के संदर्भ में नए अर्थों और संभावनाओं के साथ
पुनर्पाठित करता है।
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Pages:83-86
How to cite this article:
विशाल प्रताप मित्र "तुलसीदास तथा भारतीय आध्यात्मिकता: भक्ति, करुणा एवं मोक्ष की अवधारणाओं का विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 6, 2025, Pages 83-86
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