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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 6 (2025)
पुस्तक और समाचारपत्र परिदान (सार्वजनिक पुस्तकालय) अधिनियम,1954 के वर्तमान समय में प्रासंगिक मूल्यों पर एक अध्ययन
Authors
पुखराज प्राज, भूमिका
Abstract
भारत सरकार द्वारा पारित डिलीवरी ऑफ बुक्स एंड न्यूज़पेपर एक्ट, 1954 का उद्देश्य देश में प्रकाशित पुस्तकों और समाचारपत्रों की प्रतियाँ राष्ट्रीय और सार्वजनिक पुस्तकालयों को उपलब्ध कराना है। यह अधिनियम ज्ञान के संरक्षण, सूचना की लोकतांत्रिक पहुँच और शोध के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। वर्तमान डिजिटल युग में, जहाँ सूचना का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, यह अधिनियम और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। इस अधिनियम के तहत प्रत्येक प्रकाशक को प्रकाशित सामग्री की प्रतियाँ एक माह के अंदर चार प्रमुख पुस्तकालयों (कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय सहित) को भेजनी होती हैं। यह व्यवस्था देश के बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में सहायक है। अधिनियम का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी है, जिससे इसकी गंभीरता स्पष्ट होती है। वर्तमान समय में इस अधिनियम की प्रासंगिकता कई स्तरों पर देखी जा सकती है। सबसे पहले, यह अधिनियम डिजिटल अभिलेखन की दिशा में सहायक है। पुस्तकालयों में प्राप्त सामग्री को डिजिटाइज़ कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे देश के नागरिकों को कहीं से भी जानकारी प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। यह डिजिटल इंडिया और नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी जैसी पहलों को मजबूती देता है। डिलीवरी ऑफ बुक्स एंड न्यूज़पेपर एक्ट, 1954 आज भी भारत में सूचना के संरक्षण और सार्वजनिक ज्ञान की उपलब्धता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इसके दायरे को डिजिटल सामग्री तक विस्तारित किया जाए और क्रियान्वयन को सशक्त बनाया जाए, तो यह अधिनियम भविष्य की ज्ञान-आधारित समाज की नींव बन सकता है।
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Pages:110-113
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पुखराज प्राज, भूमिका "पुस्तक और समाचारपत्र परिदान (सार्वजनिक पुस्तकालय) अधिनियम,1954 के वर्तमान समय में प्रासंगिक मूल्यों पर एक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 6, 2025, Pages 110-113
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