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International Journal of
Humanities and Social Science Research
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VOL. 11, ISSUE 6 (2025)
छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक पुस्तकालयों में हरित पुस्तकालय अभ्यास पर एक समीक्षात्मक अध्ययन (पर्यावरण की दिशा में एक नया कदम)
Authors
पुखराज प्राज, डिगेश धृतलहरे
Abstract
आज के समय में पूरी दुनिया पर्यावरण से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है, जैसे - हवा और पानी का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, और ऊर्जा की कमी। इन सब कारणों से हमारे जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए अब यह जरूरी हो गया है कि हर क्षेत्र, चाहे वह उद्योग हो, शिक्षा हो या पुस्तकालय, सभी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनें और "हरित" यानी पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाएँ। पुस्तकालय केवल किताबें देने या जानकारी उपलब्ध कराने की जगह नहीं है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने और लोगों को शिक्षित करने का एक बहुत महत्वपूर्ण केंद्र है। जब पुस्तकालय खुद पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में कदम उठाते हैं, तो वे समाज के लिए एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। "हरित पुस्तकालय" का मतलब होता है ऐसा पुस्तकालय जो अपनी गतिविधियों-जैसे भवन निर्माण, ऊर्जा उपयोग, कागज की बचत, कचरे का प्रबंधन, और डिजिटल सेवाओं के उपयोग-में पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। इसका उद्देश्य है कि पुस्तकालय का संचालन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना, अधिक से अधिक टिकाऊ और स्वच्छ तरीके से हो।
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Pages:105-109
How to cite this article:
पुखराज प्राज, डिगेश धृतलहरे "छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक पुस्तकालयों में हरित पुस्तकालय अभ्यास पर एक समीक्षात्मक अध्ययन (पर्यावरण की दिशा में एक नया कदम)". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 11, Issue 6, 2025, Pages 105-109
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