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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
सार्वजनिक प्रशासन में महिलाओं की भूमिका: प्रवृत्ति और चुनौतियां
Authors
रितु रानी
Abstract
सार्वजनिक प्रशासन में महिलाओं की भूमिका समय के साथ निरंतर परिवर्तित होती रही है। स्वतंत्रता पूर्व काल में जहाँ प्रशासनिक क्षेत्र पुरुष प्रधान था, वहीं आज महिलाओं की भागीदारी नीति-निर्माण, क्रियान्वयन और नेतृत्व के विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। भारतीय संविधान ने समान अवसर और लैंगिक समानता की गारंटी दी है, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं को प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश का अधिकार प्राप्त हुआ। पंचायती राज संस्थाओं में 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया है। इन सुधारों के बावजूद, महिलाओं को आज भी कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव, असमान वेतन, सामाजिक रूढ़ियों और निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में सीमित भागीदारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
समकालीन प्रशासनिक व्यवस्था में महिलाओं की उपस्थिति न केवल दक्षता बढ़ाती है बल्कि नीतियों में संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय का तत्व भी जोड़ती है। डिजिटल प्रशासन, सुशासन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के संदर्भ में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। भविष्य में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी के लिए लैंगिक समानता, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संवेदनशील नीति-निर्माण आवश्यक है। इस शोध का उद्देश्य सार्वजनिक प्रशासन में महिलाओं की भूमिका का विश्लेषण करना और उससे संबंधित प्रवृत्तियों एवं चुनौतियों का मूल्यांकन करना है।
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Pages:8-13
How to cite this article:
रितु रानी "सार्वजनिक प्रशासन में महिलाओं की भूमिका: प्रवृत्ति और चुनौतियां". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 8-13
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