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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
सल्तनत कालीन भारत में हकीमों और वैद्यों की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति: एक विस्तृत ऐतिहासिक विश्लेषण
Authors
जूही आर्या, डॉ. सुनील कुमार चौधरी
Abstract
यह शोध पत्र दिल्ली सल्तनत (1206-1526 ई.) के काल में चिकित्सा व्यवसाय से संबंधित हकीमों (यूनानी चिकित्सक) और वैद्यों (आयुर्वेदिक चिकित्सक) की सामाजिक प्रतिष्ठा, राजनीतिक प्रभाव और आर्थिक स्थिति का एक समग्र और गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि मध्यकालीन भारत में राजनीतिक अशांति के दौरान चिकित्सा वर्ग ने सामाजिक स्थिरता और सांस्कृतिक समन्वय में किस प्रकार एक पुल का कार्य किया। शोध यह स्पष्ट करता है कि सल्तनत काल में चिकित्सक केवल स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नहीं थे, बल्कि वे राज्य के उमरा (अभिजात वर्ग) का अभिन्न हिस्सा थे। वे सुल्तानों के राजनीतिक सलाहकार, कूटनीतिक दूत और प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सक्रिय थे। यह पत्र विशेष रूप से खिलजी और तुगलक वंश के दौरान चिकित्सा संस्थानों (दारुल-शिफा) के उदय तथा लोदी काल में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के बौद्धिक संश्लेषण (जैसे मादन-उल-शिफा की रचना) का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। अतिरिक्त रूप से, यह शोध इक्ता प्रणाली के अंतर्गत चिकित्सकों को प्रदान किए गए आर्थिक संरक्षण और हिंदू-मुस्लिम चिकित्सकों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का परीक्षण करता है। अतः, यह अध्ययन प्रमाणित करता है कि सल्तनत कालीन भारत में चिकित्सा का क्षेत्र धार्मिक सहिष्णुता और वैज्ञानिक उन्नति का एक उत्कृष्ट उदाहरण था, जिसने भारत की मिश्रित संस्कृति की नींव को सुदृढ़ किया।
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Pages:37-40
How to cite this article:
जूही आर्या, डॉ. सुनील कुमार चौधरी "सल्तनत कालीन भारत में हकीमों और वैद्यों की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति: एक विस्तृत ऐतिहासिक विश्लेषण". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 37-40
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