Logo
International Journal of
Humanities and Social Science Research
ARCHIVES
VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य में सार्क की प्रासंगिकताः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. अमित कुमार
Abstract
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना को लगभग चार दशक बीत चुके हैं, फिर भी यह क्षेत्र वैश्विक पटल पर सबसे कम एकीकृत क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में सार्क की प्रासंगिकता एक गहन विश्लेषणात्मक बहस का विषय है, जहाँ एक ओर साझा सांस्कृतिक, भौगोलिक और सामाजिक समानताएं सहयोग के लिए एक अनुकूल आधार प्रस्तुत करती हैं, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक विवाद, राजनीतिक अविश्वास और संस्थागत सीमाएं इसके मार्ग में अभेद्य दीवार बनकर खड़ी हैं । विशेष रूप से 2014 के काठमांडू शिखर सम्मेलन के पश्चात से सार्क लगभग एक निष्क्रिय अवस्था में है, जिसका प्राथमिक कारण भारत और पाकिस्तान के मध्य जारी कूटनीतिक तनाव और सीमा पार आतंकवाद है। हाल के वर्षों में क्षेत्रीय परिदृश्य में अत्यंत तीव्र गति से बदलाव आए हैं। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन और डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा सार्क को पुनर्जीवित करने के मुखर प्रयासों ने इस संगठन के भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है। इसके समानांतर, चीन जैसे बाह्य राष्ट्रों का बढ़ता भू-आर्थिक प्रभाव, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच उभरता नया शीत युद्ध, और बिम्सटेक (ठप्डैज्म्ब्) जैसे वैकल्पिक क्षेत्रीय मंचों का तेजी से उदय सार्क के अस्तित्व के लिए नई चुनौतियाँ और अवसर दोनों उत्पन्न कर रहा है। यह विश्लेषणात्मक अध्ययन सार्क की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय असंतुलन की संरचना, बांग्लादेश और पाकिस्तान की विदेश नीति के प्रभावों, और संगठन के समक्ष उपस्थित व्यापक चुनौतियों का गहराई से मूल्यांकन करती है। अंत में, यह रिपोर्ट यूरोपीय संघ (म्न्) और आसियान (।ैम्।छ) के श्प्रकार्यवादश् (थ्नदबजपवदंसपेउ) मॉडल पर आधारित कुछ व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करती है, जिनके माध्यम से सार्क को 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढाला जा सकता है और इसे एक मृतप्राय संगठन से एक जीवंत क्षेत्रीय तंत्र में बदला जा सकता है।
Download
Pages:330-335
How to cite this article:
डॉ. अमित कुमार "बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य में सार्क की प्रासंगिकताः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 330-335
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.