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VOL. 12, ISSUE 1 (2026)
नागरिक समाज
Authors
Dr. Ashutosh Sharma
Abstract
नागरिक समाज (Civil Society) सरकार, बाजार और परिवार के दायरे से बाहर सक्रिय रहने वाले स्वैच्छिक, स्वतंत्र और गैर-सरकारी संगठनों का एक ऐसा समूह है, जो सामाजिक हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सेतु का कार्य करता है। ऐतिहासिक रूप से सिसरो से लेकर आधुनिक विचारकों तक इसकी अवधारणा में व्यापक बदलाव आए हैं। जहाँ जॉन लॉक इसे नागरिक सरकार के समतुल्य मानते हैं, वहीं ब्रिटिश अर्थशास्त्रियों, हीगल और कार्ल मार्क्स ने इसे मुख्य रूप से आर्थिक गतिविधियों और निजी संपत्ति के क्षेत्र से जोड़ा। इसके विपरीत, एंटोनियो ग्रामशी ने इसे राजनीतिक और सांस्कृतिक आयाम देते हुए श्वैचारिक आधिपत्यश् (Hegemony) और श्सहमति के सृजनश् का मुख्य केंद्र माना। अलेक्सिस डी टॉकविले और रॉबर्ट पुटनैम जैसे विचारक इसे मजबूत लोकतंत्र और नागरिक सहभागिता के लिए अनिवार्य मानते हैं। वर्तमान में यह क्षेत्र एक ओर जहाँ सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास और नागरिक अधिकारों को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को सुदृढ़ करता है, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों की संदेहास्पद और गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियां इसकी नकारात्मक भूमिका को भी रेखांकित करती हैं।
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Pages:490-492
How to cite this article:
Dr. Ashutosh Sharma "नागरिक समाज". International Journal of Humanities and Social Science Research, Vol 12, Issue 1, 2026, Pages 490-492
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